फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Study: आप अपने साथ लेकर घूम रहे हैं कोरोना का सबसे बड़ा स्रोत, हाथ धोते रहने के बाद भी इससे हो सकता है संक्रमण

Sun, 10 Sep 2023 06:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कोरोनावायरस का जोखिम - फोटो : Pixabay
कोरोनावायरस वैश्विक स्तर पर पिछले तीन साल से अधिक समय से गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन दिनों कई देशों में कोरोना के नए वैरिएंट्स का जोखिम भी तेजी से बढ़ता जा रहा है, ये वैरिएंट्स अपेक्षाकृत अधिक संक्रामकता वाले बताए जा रहे हैं और इसकी शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देने वाली क्षमता के कारण उन लोगों में भी संक्रमण का जोखिम बना हुआ है जिनका पहले वैक्सीनेशन हो चुका है या फिर जिनके शरीर में प्राकृतिक संक्रमण के बाद इम्युनिटी विकसित हो चुकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को कोरोना के जोखिमों को लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

कोरोना के जोखिमों को लेकर किए गए एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि भले ही संक्रमण से बचाव के लिए हम कितने उपाय क्यों न करते रहें पर जाने-अनजाने अपने साथ ही कोरोना का बड़ा स्रोत लेकर घूम रहे होते हैं। शोध में पाया गया कि जिस समय पूरी दुनिया में कोरोना के मामले चरम पर थे, उस दौरान परीक्षण किए गए आधे से अधिक मोबाइल फोन्स को सार्स-सीओवी-2 वायरस से दूषित पाया गया। यह लोगों में संक्रमण फैलाने का एक बड़ा कारण हो सकता है। 
विज्ञापन

2 of 5
फोन पर हो सकते हैं कई प्रकार के वायरस - फोटो : istock
फोन पर हो सकते हैं गंभीर वायरस

अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर शोधकर्ताओं ने बताया कि कोरोना से बचाव के लिए बहुत जरूरी है कि आप फोन को समय-समय पर साफ करते रहें। ऑस्ट्रेलिया में बॉन्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 10 देशों में किए गए 15 अध्ययनों की व्यापक समीक्षा की, जिनमें 2019 से 2023 तक अस्पताल सेटिंग्स में मोबाइल फोन पर सार्स-सीएवी-2 की जांच की गई।

जांचे गए 511 फोनों में से 231 (45 प्रतिशत) पर कोरोनावायरस के मौजूदगी की पुष्टि की गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये संक्रमण के प्रसार को बढ़ाने का एक प्रमुख कारण हो सकती है, जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
विज्ञापन

3 of 5
कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

जर्नल ऑफ इंफेक्शन एंड पब्लिक में प्रकाशित किए गए रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना का वायरस मोबाइल फोन जैसी कांच की सतहों पर 28 दिनों तक जीवित रह सकता है। दुनिया भर में सात अरब से अधिक मोबाइल फोन उपयोग में हैं, ये उपकरण प्रभावी रूप से कोरोना संक्रमण के लिए 'थर्ड हैंड' के रूप में कार्य करते हैं। 

विश्वविद्यालय में आणविक जीवविज्ञान के प्रमुख शोधकर्ता और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. लोटी ताजौरी का मानना है कि संक्रामक रोगों की रोकथाम को ध्यान में रखते हुए ये बड़ा जोखिम कारक है। लॉकडाउन, सीमा बंदी, सामाजिक दूरी जैसे कड़े नियंत्रण उपायों के बावजूद, कोविड-19 के तेजी से वैश्विक प्रसार के लिए यह बड़ा जोखिम हो सकता है, जिसे हमेशा हम अपने साथ लेकर घूम रहे होते हैं।

4 of 5
मोबाइल के स्क्रीन पर हो सकते हैं कई प्रकार के वायरस - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

शोधकर्ता कहते हैं 'आप जितनी बार चाहें अपने हाथ धो सकते हैं, लेकिन जैसे ही आप अपने मोबाइल फोन को छूते हैं, आप खुद को फिर से दूषित कर लेते हैं। अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 26 स्वास्थ्य कर्मियों के मोबाइल फोन पर 11,163 रोगाणु पाए गए, जिनमें रोगजनक वायरस और एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया भी शामिल थे।

यह सिर्फ कोरोनावायरस के लिए ही जोखिम कारक नहीं है, फोन के माध्यम से कई और प्रकार के संक्रामक रोगों के बढ़ने का भी जोखिम हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कोरोना से बचाव के लिए करते रहें प्रयास - फोटो : pixabay
हाथों के साथ फोन की स्वच्छता का भी रखें ध्यान

अध्ययन के निष्कर्षों पर प्रकाश डालते हुए शोधकर्ता बताते हैं, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने साथ पराबैंगनी-सी लाइट फोन सैनिटाइज़र की भी व्यवस्था की जानी चाहिए, जिससे फोन पर मौजूद बैक्टीरिया और वायरस के खतरे को कम किया जा सके। यूवी-सी लाइट, माइक्रोबियल डीएनए को नष्ट करके कीटाणुओं को प्रभावी ढंग से मारता है और 5-10 सेकंड के भीतर फोन को कीटाणुरहित कर सकता है।

जहां ये सुविधा नहीं है उन्हें फोन की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। 


--------------
स्रोत और संदर्भ
Presence of Multidrug-Resistant Bacteria on Mobile Phones of Healthcare Workers Accelerates the Spread of Nosocomial Infection and Regarded as a Threat to Public Health in Bangladesh

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें