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कोरोना वायरस से भारत में हो रही कम मौतें, अमेरिकी अखबार ने बताया रहस्य, आखिर क्या है वजह?

Sat, 18 Jul 2020 06:48 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Death Toll - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना संक्रमण से इस समय विश्व की बड़ी आबादी प्रभावित है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस और ब्राजील की तरह भारत भी इससे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में शामिल है। भारत में कोरोना वायरस संक्रमितों का आंकड़ा 10.46 लाख पार कर चुका है, जबकि मरने वालों की संख्या 26 हजार पार कर चुकी है। ऐसे में अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत भी कोरोना प्रभावित देशों में टॉप-3 देशों में शामिल है। कोरोना संक्रमित लोगों में से महज कुछ ही फीसदी लोगों की मौत हो रही है। लेकिन भारत में कोरोना से हो रही कम मौतों को अमेरिका के प्रमुख अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने रहस्य बताया है। 
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कोरोना वायरस संक्रमित(File Photo) - फोटो : Amar Ujala
  • अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर भारत के आंकड़ों में 'विरोधाभास' है। दरअसल अमेरिका और ब्राजील में जब कोरोना के कुल मामले 10 लाख थे तो वहां इससे होने वाली मौत का आंकड़ा 50 हजार के करीब था। लेकिन भारत में जब कोरोना संक्रमितों के 10 लाख मामलों में मौत का आंकड़ा आधा यानी करीब 25 हजार रहा। 
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कोरोना वायरस से मौत(File Photo) - फोटो : PTI
  • 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने 'as india skyrockets past 1 million coronavirus cases, a mystery surroundss death toll' शीर्षक से प्रकाशित अपनी खबर में लिखा है, "इस बात के कई संकेत मिले हैं कि कोरोना से होने वालीं कई मौतें रिपोर्ट नहीं हो पाती हैं और भारत में पर कैपिटा टेस्टिंग रेट यानी जांच दर भी कम ही है।" भारत सरकार एक तरफ कह रही है कि अन्य देशों के मुकाबले भारत ठीक से इस महामारी से निपट रहा है। लकिन देश के ग्रामीणा क्षेत्रों में एक बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सुविधाएं मयस्सर नहीं होती और उन्हें जांच सुविधा मिलने की संभावना भी कम रहती है। 

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कोरोना वायरस संक्रमितों के लिए तैयार वार्ड (File Photo) - फोटो : PTI
  • कुछ शोध अध्ययनों की मानें तो भारत में मौत के आंकड़े कम होने के पीछे टीबी की वैक्सीन बीसीजी, वायरस के कम घातक स्ट्रेन के मौजूद होने के साथ ही जिनेटिक और इम्यूनिटी फैक्टर को भी वजह बताया जा रहा है, लेकिन अमेरिकी अखबार ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा है कि इन सारी थ्योरीज के लिए अब तक प्रमाण नहीं मिले हैं। रूस में कोरोना संक्रमितों की संख्या 7.65 लाख के बावजूद मौत के आंकड़े साढ़े 12 हजार से कम है। अमेरिकी अखबार ने इसपर पर भी सवाल उठाए गए हैं। 
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कोरोना वायरस से मौत(File Photo) - फोटो : PTI
  • टोरंटो यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोग विशेषज्ञ प्रभात झा के मुताबिक, महामारी रोकने का एक ही रास्ता है कि हमारे पास बेहतर आंकड़े हों, लेकिन ये आंकड़े ठीक से नहीं जुटाए जा रहे हैं। अमेरिकी अखबार का कहना है कि विकसित देशों में भी कोरोना से जुड़ी मौतों की एक्चुअल यानी सही संख्या सरकारी आंकड़ों में दर्ज नहीं हो पाई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • वॉशिंगटन पोस्ट ने भारत के चार बड़े शहर, मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता से मार्च से लेकर जून तक हुई मौतों के आंकड़े मांगे। अखबार का दावा है कि केवल मुंबई ने ही सही और अप टू डेट आंकड़ा दिया, वहीं कोलकाता ने कोई आंकड़ा नहीं दिया। अमेरिकी अखबार का दावा है कि मुंबई में मई में 12,963 मौतें हुईं। जबकि पिछले साल इसी महीने 6832 मौतें हुई थीं। यानी मौत के आंकड़ों में 6,131 की बढ़ोतरी हुई मगर कोरोना से हुई सिर्फ 2269 मौतें दर्ज की गईं। हालांकि, मुंबई के नगरपालिका आयुक्त आईएस चहल के मुताबिक, लॉकडाउन की वजह से पिछले महीने का आंकड़ा देरी से जोड़ा गया, इसलिए मौत का आंकड़ा अधिक आया है। 
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Coronavirus Test - फोटो : PTI
  • इधर, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के. श्रीनाथ रेड्डी का कहना है कि सामान्य दिनों में भारत में मौत के 20 फीसदी आंकड़े रिपोर्ट नहीं होते। कारण कि लोगों की मौत घर या शहर से बहुत दूर होती है। इस आधार पर उनका कहना है कि कोरोना से होने वाली मौत की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा होगी, लेकिन बिना कितनी ज्यादा होगी, यह बिना किसी शोध के नहीं कहा जा सकता है। 
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कोरोना वायरस से मौत(File Photo) - फोटो : PTI
  • अमेरिकी अखबार 'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने कब्रिस्तान और शवदाह गृहों में आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक शव पहुंचने की बात कही है। मालूम हो कि कोरोना वायरस से प्रभावित होने वाले देशों में अमेरिका टॉप पर है। यहां कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 37.71 लाख पार कर चुका है, जबकि कोरोना से मरने वालों की संख्या 1.42 लाख पार कर चुकी है। 
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