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Coronavirus Study: क्या ब्रिटेन के लोगों में विकसित हो गई हर्ड इम्यूनिटी, दूसरी लहर में होगी कम मौतें?

Sat, 18 Jul 2020 01:39 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Herd Immunity: क्या कोरोना के खिलाफ विकसित हो गई 'हर्ड इम्यूनिटी'? - फोटो : iStock/Amar Ujala
कोरोना वायरस का संकमण देश और दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है। हर दिन इससे होने वाली मौतों का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। खासकर अमेरिका, रूस, ब्राजील, भारत आदि देश इससे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। ब्रिटेन में भी इस वैश्विक महामारी का कहर लगातार बढ़ रहा है। इस बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक शोध अध्ययन में दावा किया गया है कि ब्रिटेन में लोगों के बीच हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो चुकी है। कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर आने की स्थिति में यही लोगों को बचाएगी। इस अध्ययन ने बहुत सारे विशेषज्ञों को चौंका दिया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर अबतक कई बार यह चर्चा हो चुकी है कि 'हर्ड इम्यूनिटी' के जरिए कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा सकता है। हालांकि दूसरी ओर कई शोध अध्ययनों में विशेषज्ञों ने इसकी संभावित सफलता पर प्रश्नचिह्न भी खड़ा किया है। हर्ड इम्यूनिटी यानी वह स्थिति, जब किसी देश की 60 से 70 फीसदी आबादी या तो इम्यून हो जाए या फिर बीमारी से संक्रमित हो जाए तो बाकी बचे लोग भी महामारी से बच सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की इस रिसर्च स्टडी में कहा गया है कि ब्रिटेन में सामान्य सर्दी-जुकाम या मौसमी वायरल फ्लू आदि संक्रमण की वजह से लोगों में हर्ड इम्यूनिटी यानी सामूहिक तौर पर प्रतिरोधक क्षमता इतनी है कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना किया जा सकता है। इस रिसर्च स्टडी में भारतीय मूल की प्रोफेसर सुनेत्रा गुप्ता भी शामिल हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • शोधपत्र के मुताबिक, सामान्यत: किसी महामारी वाले क्षेत्र के लिए संक्रमण की रोकथाम के लिहाज से इम्यूनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता का जरूरी स्तर 50 फीसदी अधिक होता है। अध्ययन में कहा गया है कि बड़े स्तर पर मौसमी संक्रमण की रोकथाम के प्रमाणों को देखते हुए यह मानना तर्कसंगत होगा कि ज्यादातर आबादी में इन रोगों के खिलाफ इम्यूनिटी मौजूद हो गई होगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दूसरी लहर में कम मौतें होंगी
  • ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में थियोरेटिकल एपिडेमियोलॉजी की प्रोफेसर सुनेत्रा गुप्ता ने अपने अध्ययन में कहा है कि लोगों में इम्यूनिटी का स्तर कोरोना की चपेट में आने से भी बढ़ेगी। ऐसे में दोबारा कोरोना महामारी का प्रकोप होने की स्थिति में इस बार की अपेक्षा कम लोगों की मौत होगी। खासकर कम उम्र में अन्य बीमारियों के मरीजों में संक्रमण के मामले कम होंगे। 
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
  • प्रो. गुप्ता और उनके सहयोगियों जोस लॉरेंसो, फ्रांसेस्को पिनोटी तथा क्रेग थांपसन ने अपने अध्ययन में कहा है, "नई स्टडी यह भी संकेत करती है कि जब अच्छी इम्यूनिटी वाले लोग कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के साथ मिलते-जुलते हैं तो सामूहिक यानी हर्ड इम्यूनिटी का स्तर तेजी से घटता है। हालांकि इस अध्ययन का अभी व्यापक विश्लेषण नहीं हुआ है और इसकी समीक्षा किए जाने की जरूरत बताई जा रही है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • प्रो. गुप्ता ने पहले एंटीबॉडी जांच बढ़ाने पर जोर देने की जरूरत बताई थी ताकी पता चल सके कि ब्रिटेन की आबादी में कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधी क्षमता का स्तर मजबूत हो रहा है या नहीं। मालूम हो कि कोरोना वायरस का कम्यूनिटी ट्रांसमिशन यानी सामुदायिक प्रसार रोकने के लिए इसकी चेन तोड़ना बहुत जरूरी है। इसी चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन जैसे कदम उठाए जाते रहे हैं।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता - फोटो : Pixabay
हर्ड इम्यूनिटी को ऐसे समझें
  • आम तौर पर हर्ड इम्यूनिटी शब्द टीकाकरण के संदर्भ में प्रयोग किया जाता है। यानी किसी बीमारी के खिलाफ बड़ी आबादी को वैक्सीन के जरिए सुरक्षित कर देना। लेकिन यह तब भी हासिल हो जाती है, जब आबादी का एक निश्चित हिस्सा बीमारी से संक्रमित हो जाए, ताकी उनमें संक्रमण के खिलाफ इम्यूनिटी विकसित हो जाए। यह निश्चित हिस्सा 50 से 80 फीसदी तक हो सकता है। ऐसी स्थिति में बची हुई आबादी भी महामारी से लड़ने के काबिल हो जाती है।
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