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CoronaVirus: इन सतहों पर 2-4 नहीं बल्कि इतने दिनों तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस

Mon, 12 Oct 2020 07:02 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कितने दिनों तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस? - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 बीमारी के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस बैंक नोट, फोन की स्क्रीन और स्टेनलेस स्टील जैसी कुछ सतहों पर 28 दिनों तक जीवित रह सकता है। ऑस्ट्रेलिया की नेशनल साइंस एजेंसी का कहना है कि SARS-Cov-2 वायरस कुछ सतहों पर उससे कहीं अधिक देर तक जीवित रह सकता है जितना सोचा गया था। हालांकि, ये शोध अंधेरे में और स्थिर तापमान में किया गया था। जबकि हाल में पता चला है कि अल्ट्रावायलेट लाइट के इस्तेमाल ये कोरोना वायरस नष्ट हो जाता है। कुछ जानकार इस बात पर संदेह जताते हैं कि सतह पर मौजूद वायरस से इंसान के संक्रमित होने का कितना वास्तविक खतरा होता है। अधिकतर मामलों में कोरोना वायरस का संक्रमण लोगों की खांसी, छींक या बात करने से निकले थूक के बारीक कणों से होता है।
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Coronavirus - फोटो : iStock
शोध में क्या कहा गया है?
इससे पहले लैब में हुए टेस्ट में पता चला था कि बैंक नोट और कांच पर कोरोना वायरस दो या तीन दिनों तक ही जीवित रह सकता है जबकि प्लास्टिक और स्टेनलेस स्टील की सतह पर ये छह दिन तक जिंदा रह सकता है। हालांकि लैब टेस्ट के नतीजों में थोड़ा फर्क था। लेकिन ऑस्ट्रेलियाई एजेंसी सीएसआईआरओ की एक रीसर्च का कहना है कि ये वायरस 'बेहद मजबूत' है और 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान और अंधेरे में मोबाइल फोन के कांच, प्लास्टिक और बैंक नोट जैसी चिकनी सतहों पर 28 दिनों तक जीवित रह सकता है।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस की तुलना में ऐसी ही परिस्थिति मे फ्लू का वायरस 17 दिनों तक जीवित रह सकता है।वायरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिसर्च में पता चला है कि ठंडे तापमान की तुलना में गर्म तापमान में ये वायरस कम देर तक जीवित रहता है। 40 डिग्री सेल्सियस पर रखने पर कुछ सतहों पर ये वायरस चौबीस घंटों के भीतर संक्रामक नहीं रह जाता। चिकनी और कम खुदरा सतहों पर ये वायरस अधिक दिनों तक जीवित रह सकता है जबकि कपड़े जैसी खुदरा सतह पर ये 14 दिनों के बाद जीवित नहीं रह सकता।

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Coronavirus - फोटो : iStock
क्या इस पर कुछ असहमति है?
कार्डिफ यूनिवर्सिटी के कॉमन कोल्ड सेंटर के पूर्व निदेशक प्रोफेसर रॉन एक्सेल ने इस रिसर्च की आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि इसमें कहा गया है कि वायरस 28 दिनों तक जीवित रह सकता है, जिससे "लोगों में अनावश्यक डर" पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा, "ये वायरस खांसी या छींक में गिरे थूक के बारीक कणों और गंदे हाथों से फैलता है। लेकिन इस शोध में वायरस फैलने के कारण के रूप में इंसान के ताजा बलगम का इस्तेमाल नहीं किया गया है।" इंसान के ताजा बलगम में बड़ी संख्या में व्हाइट सेल्स होते हैं जो वायरस को नष्ट करने के लिए एन्जाइम बनाते हैं। बलगम में वायरस से मुकाबला करने के लिए एंटीबॉडी और केमिकल भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "मेरी राय में संक्रामक वायरस सतह पर गिरे बलगम में कुछ घंटों के लिए ही जीवित रह सकते हैं न कि कई दिनों के लिए।"
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
इसी साल जुलाई में रटगर्स यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर इमानुएल गोल्डमैन का एक पेपर जानीमानी पत्रिका लैंसेट में छपा था। इसमें कहा गया था कि "सतह पर पड़े थूक के कणों से संक्रमण का खतरा कम होता है।" वो कहते हैं कि ऐसे शोध जो वायरस के कारण बड़ा खतरा बताते हैं उनमें "वास्तविक जीवन के हालातों से कम ही समानता होती है। बीते सप्ताह कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में मेडिसीन प्रोफेसर मोनिका गांधी ने कहा था कि कोरोनो वायरस सतहों के जरिए नहीं फैलता।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
'हाथ और टचस्क्रीन को साफ रखने की आदत डालें'
कोविड-19 का वायरस मुख्य रूप से हवा के जरिए फैलता है। अब तक हुए शोध में पता चला है कि ये वायरस हवा में मौजूद कणों में तीन घंटों तक जीवित रह सकता है। अब तक इस बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है कि बैंक नोट और टचस्क्रीन जैसे सतहों के जरिए ये कितनी तेजी से फैल सकता है। स्टेनलेस स्टील की सतह पर ये वायरस कितनी देर तक जीवित रह सकता है इसे लेकर हाल में जो शोध हुए हैं उनमें पता चला है कि सामान्य तापमान में ये स्टेनलेस स्टील पर तीन से 14 दिनों तक जीवित रह सकता है।
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Research - फोटो : Pixabay
नई रिसर्च में देखा गया कि कांच, कागज, प्लास्टिक के नोटों और स्टील पर ये वायरस कितनी देर तक जीवित रह सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इन सभी सतहों पर 20 डिग्री सेल्सियस पर 28 दिनों के बाद भी वायरस का पता लगाया जा सकता है। इसमें वायरस के जीवित रहने का वक्त पहले के शोध से कहीं अधिक बताया गया है। ये शोध जिन परिस्थितियों में किया गया वो वायरस के अनुकूल थे, मसलन अंधेरा कमरा, स्थिर तापमान और नम हवा। लेकिन असल जिंदगी में वायरस को अपने अनुकूल परिस्थिति कम ही मिलती है। फिर भी, शोध के ये नतीजे एक बार फिर बताते हैं कि संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए नियमित रूप से हाथ धोने और टचस्क्रीन को धोने या सैनिटाइज करने की जरूरत है। साथ ही संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए हमें अपना चेहरा छूने से बचना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्यों महत्वपूर्ण है ये रिसर्च?
सीएसआईआरओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ। लैरी मार्शल कहते हैं, "किसी सतह पर ये वायरस कितनी देर तक टिका रह सकता है, ये जानकारी हमें वायरस से निपटने की कोशिशों, संक्रमण को कम करने और लोगों को बचाने में मदद करती है।" रिसर्च में शामिल सदस्यों का कहना है कि ठंडी परिस्थितियों में स्टेनलेस स्टील पर वायरस का अधिक देर तक जीवित रहना ये बताता है कि कोविड-19 महामारी का गंभीर असर मीट प्रोसेसिंग केंद्र और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के आसपास क्यों हुआ होगा।
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Coronavirus - फोटो : Pexels
पूरी दुनिया में मीट प्रोसेसिंग केंद्रों और बूचड़खानों में काम करने वाले हजारों लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इससे पहले वायरस संक्रमण के अधिक मामलों की एक वजह बंद कमरों में काम करना, ठंडा और नमी भरा माहौल भी बताया गया है। साथ ही अधिक आवाज करती मशीनों के आसपास काम करने वालों के ऊंची आवाज में बात करने को भी वायरस फैलने का एक अहम कारण बताया गया है। सीएसआईआरओ के शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके शोध के नतीजे पहले आए उन शोध के नतीजों से मेल खाते हैं जिनमें कहा गया था कि फ्रीजर में रखे ताजा खाने में वायरस अधिक देर तक जीवित रह सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि, "खाने या खाना पैक करने के कारण अब तक कोविड-19 के मामले दर्ज नहीं किए गए हैं।" हालांकि संगठन ये जरूर बताता है कि संक्रमण के खतरे से बचने के लिए किस तरह की सावधानियां लेना जरूरी है।
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