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विशेषज्ञों से जानिए: मस्तिष्क को किस तरह से प्रभावित करती है ड्रग्स? क्यों माना जाता है इसे बेहद खतरनाक

Thu, 28 Oct 2021 07:21 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला. नई दिल्ली
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मस्तिष्क पर ड्रग्स का असर - फोटो : Pixabay
हाल ही में फ़िल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस को लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। बाकी सारे मुद्दों से इतर सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि देश की किशोर व युवा पीढ़ी तेजी से इन नशीले पदार्थों के शिकंजे में फंस रही है। वैसे यह कोई पहला केस नहीं है, देश के कई हिस्सों में ड्रग्स का सेवन एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रहा है।

ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थ केवल इसलिए ही सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते क्योंकि उनसे नशा होता है। दरअसल इन पदार्थों का लगातार सेवन शरीर के कार्यों में असंतुलन पैदा कर सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए जरूरी होते हैं। नशीले पदार्थों का सबसे बुरा असर दिमाग पर पड़ता है, क्योंकि जब दिमाग इन पदार्थों की गिरफ्त में आता है तो उसकी काम करने की प्रक्रिया पूरी तरह गड़बड़ा जाती है। एक बार इसकी लत लगने पर इससे पीछा छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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ड्रग्स हो सकता है खतरनाक - फोटो : pixabay
युवा हो रहे हैं नशे के शिकार
पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हमारे आस-पास की दुनिया बदली है। खासकर दो पीढ़ियों के बीच का अंतर और गहरा गया है। बच्चों के पास साधन तो हैं लेकिन संवाद करने वाला कोई अपना नहीं। वहीं जिन बच्चों के पास पर्याप्त साधन नहीं हैं वे जल्द से जल्द साधन जुटाने के लिए आतुर हैं। इन दोनों ही परिस्थितियों का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व बच्चों को नशे की दुनिया में पहुंचा देते हैं।
यदि आपके घर में भी टीनएजर या युवा है तो जरूरी है कि आप उनको समय दें और सतर्क भी रहें। कुछ ऐसी बातों पर गौर करें जो आपको बच्चे के गलत हाथों में फंसने की ओर इशारा करती हैं। 
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ड्रग्स का मस्तिष्क पर असर - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क पर ड्रग्स का असर
ड्रग्स, दिमाग में मौजूद न्यूरॉन्स के काम में बाधा डालना शुरू कर देती है। ये न्यूरॉन्स पूरे शरीर को सन्देश भेजने, सन्देश लेने और सिग्नल्स को प्रोसेस करने के काम काज को संतुलित करती हैं। मैरुआना (गांजा) और हेरोइन जैसी कुछ ड्रग्स, न्यूरॉन्स को अधिक सक्रिय बना देती हैं क्योंकि उनमें मौजूद रसायन की संरचना शरीर में उपस्थित प्राकृतिक न्यूरोट्रांसमीटर जैसा ही व्यवहार करती है। इससे दिमाग का सामान्य कार्य गड़बड़ा जाता है। इन रसायनों की अधिकता की वजह से ही दिमाग सपनीली स्थिति में पहुंच जाता है। 

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ड्रग्स से रखें बच्चों को सुरक्षित - फोटो : twitter/Social media
बच्चों की करें निगरानी
युवाओं में ड्रग्स की लत का खतरा सबसे अधिक होता है, ऐसे में अपने बच्चों के व्यवहार पर ध्यान दें, उनमें कुछ भी असामान्य दिखते ही सावधान हो जाएं।
  • अगर आपका बच्चा अचानक सबसे खिंचा-खिंचा रहने लगा है।
  • बात-बात पर चिड़चिड़ाहट, गुस्सा और खीझ दिखा रहा है।
  • घर से आपको पैसे या कोई मूल्यवान चीज गायब दिख रही है और ऐसा तीन-चार बार हो चुका हो।
  • बच्चा अपने कमरे में दरवाजा बन्द करके रहना पसंद करने लगा है और फोन पर बात करते समय किसी कोने में या बाकी लोगों से दूर जाने लगे।
  • वह ट्यूशन या किसी बहाने से घर से बाहर बार-बार जाने लगा है।
  • उसकी आंखें फूली हुई, लाल या उनींदी दिखाई दे रही हैं।
  • पढ़ाई या अन्य किसी भी काम में वह मन नहीं लगा पा रहा है/लगा पा रही है। 
  • उसकी भूख, प्यास, सोने-जागने, बात करने के पैटर्न में बदलाव आ गया है।
यह जरूरी नहीं कि ऐसा व्यवहार सिर्फ ड्रग्स की चपेट में आए बच्चे का ही हो ऐसा जरूरू नहीं है, कोई और समस्या भी इसके पीछे हो सकती है। लेकिन नशे के शिकार लोगों में यह लक्षण आम होते हैं, इसलिए इनपर गौर करें। 
 
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समय पर काउंसलिंग बहुत आवश्यक - फोटो : iStock
कैसे पाएं इस समस्या से निजात
  • सबसे पहले बच्चे से ही शांति से पूछें। ज्यादातर मामलों में इस तरह की लत के शिकार बच्चे अपनी स्थिति समझ चुके होते हैं लेकिन वे इससे निकलने का रास्ता नहीं जानते।
  • यह जानने की कोशिश करें कि कहीं बच्चे के साथ कुछ गलत तो नहीं हुआ, कोई उसका फायदा तो नहीं उठा रहा। उसे यह समझाएं कि आप उसकी इससे बाहर निकलने में मदद करेंगे और उसे डरने की कोई जरूरत नहीं है।
  • किसी अच्छे काउंसलर और चिकित्सक की मदद लें और रिहैब सेंटर में बच्चे को रखें।
  • जब तक बच्चा पूरी तरह इस समस्या से बाहर नहीं आता इलाज या सख्ती में कोताही न बरतें।
  • बच्चे के पोषण का पूरा ध्यान रखें।
  • उसे कभी यह महसूस न होने दें कि उसने जो किया उससे वह बाहर नहीं आ सकता/सकती। पूरे समय उससे संवाद रखें, उसे आने वाले कल को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना सिखाएं।


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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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