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Covid-19: लगातार आठवें सप्ताह बढ़ी अस्पताल में मरीजों की संख्या, वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर बड़ा दावा

Fri, 15 Sep 2023 01:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण बढ़ते संक्रमण के मामले - फोटो : istock
कोरोना का वैश्विक जोखिम, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। नए वैरिएंट्स एरिस (EG.5) और पिरोला के कारण यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका सहित दुनिया के कई हिस्सों में संक्रमण के मामले बढ़ने की खबर है। नए वैरिएंट्स के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों और उनमें मृ्त्युदर का जोखिम भी अधिक देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक  कोरोना के कारण अस्पताल में भर्ती रोगियों की संख्या में लगातार आठवें हफ्ते बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दो सितंबर समाप्त हुए सप्ताह की रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल में भर्ती रोगियों की संख्या 9% बढ़कर 18,871 पहुंच गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल में भर्ती रोगियों में मृत्यु के मामले भी बढ़े हैं, नए वैरिएंट्स की प्रकृति के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं सभी लोगों को कोरोना के जोखिमों को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है। नए वैरिएंट्स के खतरे को देखते हुए दो कंपनियों ने वैक्सीन को अपडेट करना भी शुरू कर दिया है। 
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नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण का खतरा - फोटो : iStock
नए वैरिएंट्स के कारण सभी में संक्रमण का खतरा

अमेरिकन मेडिकल जर्नल में मंगलवार को प्रकाशित महामारी की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 16 वर्ष और उससे अधिक उम्र के अनुमानित 97% लोगों को साल 2022 के अंत तक प्राकृतिक संक्रमण या फिर टीकाकरण के माध्यम से कोरोना के प्रति सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी थी। हालांकि इन नए वैरिएंट्स की प्रकृति शरीर में बनी प्रतिरक्षा को चकमा देने वाली मानी जा रही है, जिसका मतलब है कि नए वैरिएंट्स से किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। 
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वैक्सीन की प्रभाविकता - फोटो : iStock
मौत के जोखिम को नहीं कम करते हैं टीके

इस बीच कोरोना के टीकों की प्रभाविकता को लेकर किए गए एक हालिया अध्ययन में सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने बड़ा दावा किया है। विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि वैक्सीन, कोरोना संक्रमण के खतरे को तो कम कर सकती है पर यह मृत्यु के खतरे से बचाने में कितनी कारगर है, इसका दावा नहीं किया जा सकता है।

सीडीसी द्वारा साझा किए गए डेटा के मुताबिक प्रति मिलियन लोगों में वैक्सीन सिर्फ औसतन एक व्यक्ति में मौत के जोखिम को कम करने वाली हो सकती है। शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि कोरोना वैक्सीन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को उत्तेजित करके संक्रमण के जोखिमों को तो कम कर सकती है, पर इससे मृत्यु से कितना बचाव हो सकता है, यब बड़ा प्रश्न रहा है।

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कोरोना और फेफड़ों की समस्या - फोटो : iStock
फेफड़ों की समस्या और मृत्यु का जोखिम

कोरोना और इसके कारण मृत्यु के जोखिमों को लेकर अमेरिका में किए गए एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि यहां मरने वाले ज्यादातर लोगों में फेफड़ों की समस्या देखी गई है। फेफड़ों के कैंसर पर 2023 विश्व सम्मेलन में प्रस्तुत निष्कर्षों के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर वाले अमेरिकी रोगियों में सामान्य आबादी की तुलना में कोरोना संक्रमण के कारण मौत का खतरा अधिक था।  

जनवरी 2022 से लेकर मार्च 2023 के दौरान किए गए अध्ययन के अनुसार कोरोना ने न सिर्फ फेफड़े के रोगियों की समस्या बढ़ाई है साथ ही इसके कारण फेफड़े के कैंसर वाले रोगियों में मृत्यु का खतरा भी अधिक देखा गया है।
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नए वैरिएंट्स से करें बचाव - फोटो : Istock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स की प्रकृति स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है, इससे सभी लोगों को बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है। जिन देशों में कोरोना की स्थिति फिलहाल नियंत्रित है, उन्हें भी कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को लेकर सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है। कोरोना से बचाव के लिए लगातार प्रयास करते रहना जरूरी है। 


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स्रोत और संदर्भ
United States COVID-19 Hospitalizations, Deaths, Emergency Department (ED) Visits, and Test Positivity by Geographic Area

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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