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Heatwave: यूएन विशेषज्ञ बोले- हीटवेव से करोड़ों बच्चों की जान को खतरा, लिवर डैमेज के जोखिमों को लेकर भी अलर्ट

Fri, 12 Apr 2024 06:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हीट स्ट्रोक के साइड इफेक्ट्स - फोटो : istock
पर्यावरणीय परिवर्तन और साल-दर साल बढ़ते तापमान को सेहत के लिए बहुत हानिकारक माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने हालिया रिपोर्ट में बढ़ते हीटवेव को लेकर चेतावनी जारी कर कहा है कि दुनिया के कई देशों में हीटवेव जानलेवा दुष्प्रभावों का कारण बन सकती है। बच्चों की सेहत पर इसका सबसे अधिक दुष्प्रभाव देखा जा रहा है। इतना ही नहीं ईस्ट एशिया और प्रशांत के देशों में बढ़ती गर्मी के कारण करोड़ों बच्चों की जान पर संकट बना हुआ है। यह दुनिया के वो हिस्से हैं जहां हीटवेव और बढ़ती गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक बनी रहती है और समय के साथ ये बढ़ती भी जाती है। इतना ही  नहीं विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2024 सबसे गर्म वर्ष भी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एशियाई देशों, विशेषतौर पर भारत में भी बढ़ती गर्मी को लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है। 
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बढ़ती गर्मी के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : पिक्साबे
भारत में भी तेजी से बढ़ता जा रहा है तापमान

भारत में पिछले एक महीने में तेजी से तापमान में बढ़ोतरी देखी जा रही है। गर्मी के कारण स्वास्थ्य पर होने वाले दुष्प्रभावों को कैसे नियंत्रित किया जाए इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने विशेषज्ञों के साथ एक बैठक कर रणनीति निर्धारित की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्मी के संपर्क में आने से कई प्रकार के अल्पकालिक और दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं। इससे हर साल लोगों में फैंटनेस, हीट स्ट्रोक, त्वचा की समस्या और ब्लड प्रेशर के जोखिमों के बढ़ने का भी खतरा रहता है। हीट स्ट्रोक की स्थिति में हमारा शरीर तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है जिसके कई गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकते हैं।
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लिवर की समस्याएं - फोटो : istock
हीटवेव से लिवर की बढ़ सकती हैं दिक्कतें

कुछ अध्ययनों में अलर्ट किया जाता रहा है कि हीटवेव या गर्मी के अधिक संपर्क में रहने की स्थिति किडनी और लिवर जैसे अति महत्वपूर्ण अंगों को भी गंभीर क्षति पहुंचाती हुई देखी जा रही है। गंभीर स्थितियों में इसके कारण लिवर इंजरी और लिवर फेलियर तक का जोखिम बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने बताया, हीटवेव का सबसे ज्यादा शिकार युवा आबादी को देखा जा रहा है। कुछ लोगों में हीटवेव के कारण किडनी इंजरी, लैक्टिक एसिडोसिस (रक्तप्रवाह में लैक्टिक एसिड का निर्माण), थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (ब्लड में प्लेटलेट काउंट काफी कम होना) और रबडोमायोलिसिस (मांसपेशियों के टिशू के ब्रेकडाउन से रिलीज होने वाले हानिकारक प्रोटीन) जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।

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लिवर की बीमारियों का जोखिम - फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ? 

अमर उजाला से बातचीत में लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. संजीव रोहतगी बताते हैं, हीटस्ट्रोक के कारण लिवर इंजरी के मामले देखे जाते रहे हैं हालांकि ये काफी दुर्लभ हैं। आमतौर पर शुरुआत में इसका सही तरीके से निदान भी नहीं हो पाता है। हालांकि यदि रोगी को गंभीर हाइपोथर्मिया (तापमान 102 डिग्री से अधिक होने) है तो कुछ स्थितियों में ये गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों का कारण बन सकती है। हीटवेव की स्थिति के कारण क्रिएटिनिन बढ़ने, पेशाब का उत्पादन कम होने और अति गंभीर स्थिति में मल्टी ऑर्गन फेलियर की भी समस्या हो सकती है।

डॉ संजीव बताते हैं, लिवर कोशिकाओं में रक्त का संचार बाधित हो जाने की स्थिति में लिवर से संबंधित गंभीर समस्याओं का खतरा रहता है।
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हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : istock
तेज गर्मी-हीटवेव से करें बचाव

डॉक्टर्स कहते हैं, समय के साथ बढ़ती गर्मी और शरीर पर होने वाले इसके दुष्प्रभावों से बचाव के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है। शरीर के तापमान को बढ़ने से रोकने के उपाय किए जाने चाहिए। दिन के समय घर से बाहर जाने से बचें, खूब मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करते रहें। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, किडनी-लिवर या फिर ब्लड प्रेशर की समस्या रही है उन्हें और सावधानी बरतने की आवश्यकता है। तेज गर्मी से शरीर पर कई गंभीर दुष्प्रभावों का जोखिम हो सकता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Heat stroke leading to acute liver injury & failure: A case series from the Acute Liver Failure Study Group


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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