फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Heart Health: बड़ी कामयाबी- AI टूल की मदद से चल जाएगा पता, कहीं आपमें हृदय रोगों से मौत का खतरा तो नहीं?

Sat, 30 Mar 2024 12:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
हृदय रोगों की समस्या - फोटो : istock
हृदय रोग और इसके कारण होने वाली मौतों का जोखिम पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण हृदय की सेहत पर नकारात्मक असर देखा जा रहा है। इसके अलावा कोरोना महामारी ने इसकी दिक्कतों को और भी बढ़ा दिया है। इसलिए जरूरी है सभी लोगों को हृदय को स्वस्थ रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। गौरतलब है कि हृदय रोग दुनियाभर में मृत्यु का प्रमुख कारण भी रहे हैं।

हृदय रोगों के जोखिम को कैसे कम किया जाए, समय पर इसकी पहचान कैसे की जाए इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम लगातार शोध कर रही है। इस दिशा में  ब्रिटिश शोधकर्ताओं को बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरण विकसित किया है, दावा किया जा रहा है कि इसकी मदद से किसी व्यक्ति में वेंट्रीकुलर एरिथमिया (वीए) का आसानी से पता लगाया जा सकता है।

वेंट्रीकुलर एरिथमिया, हृदय गति से संबंधित गंभीर समस्या मानी जाती है जो निचले कक्षों (वेंट्रिकल्स) से उत्पन्न होती है। इसका समय पर निदान-उपचार न हो पाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
हृदय की समस्याओं का चलेगा पता - फोटो : iStock
एआई टूल से वेंट्रीकुलर एरिथमिया का चल सकेगा पता

वेंट्रीकुलर एरिथमिया में दिल के तेजी से धड़कने और तेजी से रक्तचाप कम-ज्यादा होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, जिसका अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो इसके कारण कई लोगों में चेतना की हानि और अचानक मृत्यु का भी खतरा हो सकता है।

इसको रोकने और समय रहते समस्या के निदान और उपचार के लिए वैज्ञानिकों ने  VA-ResNet-50 नामक AI टूल विकसित किया है। इसकी मदद से हृदय गति की समस्या का समय पर निदान करने और अगर कोई दिक्कत है तो उसका उपचार करने में मदद मिल सकती है। वेंट्रीकुलर एरिथमिया की स्थिति हार्ट फेलियर जैसी दिक्कतों का भी कारण बन सकती है।
विज्ञापन

3 of 5
हृदय गति में असामान्यता - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला

यूरोपियन हार्ट जर्नल में इसके प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार वैज्ञानिकों ने 270 वयस्कों के ईसीजी की जांच करके उनमें हृदय की स्थितियों के बारे में पता लगाने की कोशिश की।  लगभग 159 लोगों ने घातक वेंट्रिकुलर अतालता का अनुभव किया था। एआई टूल का उपयोग हृदय ताल की जांच करने के लिए किया गया था ताकि प्रतिभागियों में ये पता लगाया जा सके कि कहीं इससे भविष्य में गंभीर समस्याओं का खतरा तो नहीं है?

वैज्ञानिकों ने कहा ये टूल सटीक तरीके से समस्या के निदान में सहायक हो सकता है। हर पांच में से चार मामलों में, एआई उपकरण ने सही भविष्यवाणी की, इससे ये पता लगाना भी आसान हो सकता है कि किस मरीज में वेंट्रीकुलर एरिथमिया और इसके कारण गंभीर जोखिमों का खतरा हो सकता है?

4 of 5
हार्ट की समस्याओं का निदान - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के प्रोफेसर आंद्रे एनजी कहते हैं, महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उपकरण से ये जान सकते हैं कि किस व्यक्ति में जोखिम अधिक है। हम न सिर्फ इससे हृदय गति में समस्या के बारे में पता कर सकते हैं साथ ही इससे यह पता करने में भी मदद मिलती है कि किसे इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर के साथ जीवन रक्षक उपचार की जरूरत हो सकती है। समय रहते इन समस्याओं का निदान और उपचार से हृदय रोगों से मृत्यु के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हृदय की समस्याएं - फोटो : iStock
गंभीर हृदय समस्याओं का चल सकेगा पता

शोधकर्ता कहते हैं, मरीजों के इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम की जांच में एआई का उपयोग करते हुए हम उनमें हृदय रोग की गंभीर समस्याओं के जोखिम को निर्धारित कर सकते हैं। उचित उपचार प्राप्त होने से रोगी का जीवन बचाना आसान हो सकता है। हृदय स्वास्थ्य के संबंध में ये आवश्यक हो जाता है कि समय पर रोगी की स्थिति का निदान और उपचार हो सके। ज्यादातर स्थितियों में अगर समय पर रोगी को उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। 


--------------
स्रोत और संदर्भ
Artificial intelligence for ventricular arrhythmia capability using ambulatory electrocardiograms


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें