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आज का हेल्थ टिप्स: गंभीर डेंगू के इन चार लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, ये रहा बचाव का तरीका

Tue, 23 Nov 2021 11:09 AM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेंगू के लक्षण और बचाव का तरीका - फोटो : istock
डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन
अनुभव- 25 साल

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

कोरोना के बाद अब देश के ज्यादातर हिस्सों में डेंगू के मामलों ने हर किसी की चिंता को बढ़ा रखा है। आए दिन डेंगू के काफी मामले देश में सामने आ रहे हैं। वहीं, देखने में मिला है कि देश में पिछले कुछ सालों में डेंगू के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है। जब एडीज मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है, तो इसके कारण वो डेंगू की चपेट में आ सकता है। बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग तक इस डेंगू की बीमारी की चपेट में आ सकते हैं, जिसमें बुखार आना और प्लेटलेट्स का लगातार गिरने जैसी दिक्कतें सामने आती हैं। वहीं, कई बार ये गंभीर लक्षण जानलेवा तक हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि डेंगू के गंभीर लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न किया जाए। तो चलिए जानते हैं ये लक्षण हैं क्या, जो हमें डेंगू की चपेट में आने के संकेत देते हैं...
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डेंगू के लक्षण और बचाव का तरीका - फोटो : iStock
3-7 दिन बाद नजर आ सकते हैं ये गंभीर लक्षण:

तेज दर्द और सांस लेने में दिक्कत
  • मरीज के पेट में तेजी से दर्द उठ सकता है, और साथ ही सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है। इसकी वजह से दम घुटने जैसी स्थिति भी बन सकती है।
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डेंगू के लक्षण और बचाव का तरीका - फोटो : iStock
लगातार उल्टी आना
  • वहीं डेंगू के गंभीर लक्षणों में उल्टी आना भी एक लक्षण है। कई लोगों को लगातार उल्टी होती है, तो वहीं उल्टी में खून आने की दिककतें भी काफी सामने आती हैं।

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डेंगू के लक्षण और बचाव का तरीका - फोटो : iStock
नाक से खून आना
  • वहीं, डेंगू के गंभीर लक्षण में नाक से खून भी आता है। साथ ही मसूड़ों से भी खून निकलने की दिक्कतें होती हैं।
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डेंगू के लक्षण और बचाव का तरीका - फोटो : iStock
ये भी हैं लक्षण:-

-शरीर में लिक्विड का जम जाना़
-लिवर में परेशानी होनी
-प्लेटलेट्स का लगातार गिरना
-बेचैनी महसूस होना।
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डेंगू के लक्षण और बचाव का तरीका - फोटो : istock
ऐसे करें बचाव
  • जब कोई व्यक्ति गंभीर डेंगू की चपेट में आता है, तो उसे आईसीयू में भर्ती करने की तक जरूरत पड़ जाती है। वैसे इसका कोई सटीक इलाज तो नहीं है, लेकिन लक्षणों के हिसाब से ब्लड या प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन, इंट्रावेनस फ्लूइड और ऑक्सीजन थेरेपी के जरिए मरीज का इलाज किया जाता है। इसलिए पिछली स्लाइड्स में बताए गए लक्षणों को नजरअंदाज करने की जगह पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में  डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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