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सलाह: 'बीमारियों का भय' दूर करती है ये आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, इसके सेवन से मिलते हैं जबरदस्त फायदे

Mon, 26 Apr 2021 07:27 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बहेड़ा के फायदे - फोटो : Pixabay
आचार्य मनीष 
आयुर्वेदाचार्य


भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका उपयोग आज भी बीमारियों के उपचार में किया जाता है। इन्हीं में से एक बहेड़ा। यह प्रसिद्ध आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है। कहते हैं कि बहेड़ा का संस्कृत नाम विभीतकी है, जिसे अंग्रेजी में 'फियरलेस' यानी निर्भय कहते हैं। इसका मतलब यह है कि बहेड़ा बीमारियों का भय दूर करता है। यह रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षात्मक गुणों से भरपूर होता है। आइए जानते हैं बहेड़ा के सेवन से होने वाले फायदों के बारे में... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दस्त रोकने में है प्रभावी 
  • बहेड़ा को दस्त और पेचिश के उपचार या प्रबंधन में प्रभावी माना जाता है। इसके फल का उपयोग चीन में पारंपरिक रूप से दस्त के इलाज के लिए किया जाता है। भारत में भी डायरिया के मरीजों पर इसका अध्ययन किया गया है और प्रभावी माना गया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डायबिटीज में है फायदेमंद 
  • बहेड़ा फल का अर्क इंसुलिन के स्तर में सुधार करता है और खून में शुगर के स्तर को बढ़ने से रोकने में मदद करता है। जानवरों पर किए गए एक अध्ययन में पता चला है कि यह डायबिटीज की जटिलताओं को रोकने में प्रभावी है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पेट के लिए है फायदेमंद 
  • भारत में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, बहेड़ा फल का हाइड्रोक्लोरिक अर्क एसिडिटी और कब्ज को कम करने में मदद करता है। पारंपरिक रूप से इसका उपयोग गैस्ट्रिक अल्सर के प्रबंधन के लिए किया जाता है। अल्सर के लिए एक प्राकृतिक उपचार के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
गठिया में है प्रभावी 
  • बहेड़ा के बीज का तेल गठिया में प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा एक अध्ययन में यह भी पता चला है कि बहेड़ा किडनी की पथरी के उपचार में असरदार है और यह किडनी के समग्र कार्यों में सुधार कर सकता है। 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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