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Diabetes: गर्भावस्था में मधुमेह से मां और बच्चे दोनों को खतरा, वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया इससे बचने का तरीका

Sun, 06 Oct 2024 01:49 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्भकालीन मधुमेह का खतरा - फोटो : Freepik.com
मधुमेह वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, लगभग सभी उम्र के लोगों में इसका खतरा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी इसका प्रमुख कारण मानी जाती रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार हो सकते हैं। महिलाओं में डायबिटीज के बढ़ते जोखिमों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं, विशेषतौर पर गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज की समस्या बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है।

आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में 537 मिलियन (करीब 53.7 करोड़) से अधिक लोग मधुमेह के साथ जी रहे हैं। इसमें से गर्भकालीन मधुमेह (जेस्टेशनल डायबिटीज) का बड़ा हिस्सा रहा है। एक अनुमान के अनुसार पांच मिलियन (50 लाख) से अधिक गर्भवती महिलाओं में मधुमेह की समस्या हो सकती है। साल 2040 तक मधुमेह से पीड़ित महिलाओं की संख्या बढ़कर 31 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। गर्भकालीन मधुमेह का असर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर हो सकता है, इसलिए समय रहते इसे नियंत्रित करने के उपाय किए जाने चाहिए। 

वैश्विक स्तर पर बढ़ती इस मधुमेह की रोकथाम को लेकर हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एक कारगर तरीका बताया है, जिसका ध्यान रखकर आप डायबिटीज के खतरे से सुरक्षित रह सकती हैं।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
गर्भकालीन मधुमेह से बचाव

गर्भावस्था के दौरान मधुमेह से कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में समझने के लिए स्वीडन के वैज्ञानिकों की टीम ने अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर शरीर का वजन कंट्रोल रखा जाए तो गर्भकालीन मधुमेह के आधे से अधिक मामलों को टाला जा सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन महिलाओं को बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 से अधिक था उनमें गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज होने का खतरा अधिक था।

इस आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा, अगर गर्भधारण से पहले वजन को कंट्रोल रखा जाए तो न सिर्फ आप गर्भकालीन मधुमेह से बच सकती है, साथ ही गर्भावस्था की जटिलताओं और बच्चों में होने वाले दुष्प्रभावों को भी कम किया जा सकता है।
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अधिक वजन के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

स्वीडन के लिंकोपिंग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया मोटापा या अधिक वजन की समस्या इंसुलिन प्रतिरोध को बढ़ाने और इंसुलिन स्राव में कमी का कारण बनती है जिससे मधुमेह होने का खतरा बढ़ा जाता है। अधिक वजन की समस्या गर्भावस्था से संबंधित कई अन्य समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन की लेखिका मरियम शिरवानीफर ने कहा, हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि गर्भावधि मधुमेह के लगभग आधे मामलों को रोका जा सकता है। यह अध्ययन स्वीडन में जन्मी महिलाओं पर किया गया है, हालांकि सभी हिस्सों पर लागू होता है।

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गर्भावधि मधुमेह के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
गर्भकालीन मधुमेह के बारे में जानिए

गर्भावधि मधुमेह, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इसका निदान पहली बार गर्भावस्था (गर्भावस्था) के दौरान होता है। मधुमेह के अन्य प्रकारों की तरह गर्भावधि मधुमेह भी सेहत को कई प्रकार से प्रभावित करती है। गर्भावधि में मधुमेह के कारण ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा रहता है जिसका असर गर्भवती और बच्चे दोनों की सेहत पर देखा जाता है। 

यदि आपको गर्भावस्था के दौरान मधुमेह है, तो आमतौर पर प्रसव के बाद शुगर लेवल सामान्य हो जाता है। हालांकि ऐसी महिलाओं में बाद के समय में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 
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मधुमेह को करें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
बच्चे की सेहत पर असर

गर्भावधि के दौरान मधुमेह के कारण जन्म के समय बच्चे को अधिक वजन की दिक्कत बनी रह सकती है। कई बार तो वजन अधिक होने के कारण बच्चे बर्थ कैनाल में फंस जाते हैं। इसके अलावा जटिलातओं के कारण समय से पहले भी बच्चे का जन्म हो सकता है जिसे कई तरह की जटिलताओं वाला माना जाता है। समय से पहले पैदा होने वाले शिशुओं को सांस से संबंधित कई तरह की दिक्कतों का खतरा रहता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ आहार, व्यायाम करने जैसे उपायों का पालन करके आप वजन को कंट्रोल रख सकती हैं जिससे डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याओं से बचा जा सकता है।



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स्रोत और संदर्भ
Body Mass Index and weight gain prior to pregnancy and risk of gestational diabetes mellitus

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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