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कोरोना से जंग: तो क्या संक्रमण से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं है वैक्सीन? अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 05 Aug 2021 12:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमण का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को सबसे कारगर उपाय मान रहे हैं, कई अध्ययनों से पता चलता है कि दोनों डोज ले चुके लोगों में संक्रमण का खतरा अन्य लोगों की तुलना में काफी कम हो सकता है। पर क्या वैक्सीन लंबे समय तक हमें कोरोना के संक्रमण से सुरक्षित रख सकती है, यह सवाल लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। असल में हाल में कई ऐसे अध्ययन सामने आए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि वैक्सीनेशन से बनीं एंटीबॉडीज का असर कुछ ही महीनों में कम होना शुरू हो जाता है। इसी से संबंधित इंग्लैंड में चल रहे जनसंख्या के सर्वेक्षण में बड़ा खुलासा हुआ है।
इंग्लैंड में किए गए इस अधययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके एक तिहाई लोगों में दोबारा से संक्रमण होने का खतरा बना हुआ है। इस आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि टीकाकरण के बाद भी लोगों को खासा सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, वैक्सीनेटेड लोगों को लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए इस अध्ययन के निष्कर्ष को काफी चिंता पैदा करने वाला माना जा रहा है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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दो डोज ले चुके लोग भी हो सकते हैं संक्रमित - फोटो : PTI
टीकाकरण के बाद भी संक्रमित हो रहे हैं लोग
इंपीरियल कॉलेज लंदन और मार्केट रिसर्च कंपनी इप्सोस मोरी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए इस अध्ययन में 24 जून से 12 जुलाई के बीच 98,233 लोगों के स्वैब लिए गए। इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने हर 160 में से एक व्यक्ति को कोरोनवायरस से संक्रमित पाया। यानी कि टीकाकरण करा लेने के बाद भी लोगों को कोरोना से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। हालांकि अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, उनकी तुलना में दोनों डोज ले चुले लोगों से वायरस के संक्रमण की संभावना काफी कम हो सकती है।
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वैक्सीनेशन के बाद भी संक्रमण का खतरा बरकरार - फोटो : Social media
सौ फीसदी असरदार नहीं हो सकती है कोई भी वैक्सीन
गौरतलब है कि ब्रिटेन में दूसरी लहर के दौरान संक्रमण को रोकने के लिए लगे सभी प्रतिबंधों में 19 जुलाई से छूट देने की घोषणा की जा चुकी है, इसे देखते हुए शोधकर्ताओं ने सभी लोगों से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की सलाह दी है। इंपीरियल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर और सर्वेक्षण कार्यक्रम के निदेशक पॉल इलियट कहते हैं, वैक्सीन की दोनों डोज संक्रमण के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करती हैं, हालांकि इसके बाद भी संक्रमण के खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि कोई भी टीका 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं है। दोनों डोज ले चुके लोग भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकते हैं।

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वैक्सीन की प्रभाविकता को लेकर चर्चा - फोटो : iStock
क्या संक्रमण से सुरक्षा देने में प्रभावी नहीं हैं वैक्सीन?
'द लैंसेट' जर्नल में प्रकाशित एक शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि दोनों डोज ले चुके कई लोगों में तीन महीने में ही 50 फीसदी तक एंटीबॉडीज घट जा रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है एस्ट्राजेनेका या फाइजर वैक्सीन की दोनों खुराक के बाद एंटीबॉडी का स्तर शुरू में बहुत अधिक था, जिसे कोरोना के गंभीर संक्रमण के खिलाफ काफी सुरक्षात्मक माना जा सकता है, हालांकि दो-तीन महीनों में इनका स्तर कम होता देखा जा रहा है। कोरोना के नए वैरिएंट्स के बढ़ते मामलों के बीच यह काफी चिंता का कारण हो सकती है। 
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एक और डोज की हो सकती है जरूरत - फोटो : Pixabay
बढ़ रही है बूस्टर डोज की जरूरत
वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में भी संक्रमण के खतरे को देखते हुए वैज्ञानिक बूस्टर डोज की आवश्यकताओं पर जोर दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, जिस तरह से कोरोना के नए रूपों की संक्रामता देखी जा रही है, ऐसे में माना जा रहा है कि शायद आने वाले दिनों में लोगों को दो डोज के बाद बूस्टर डोज की जरूरत पड़ सकती है। वैक्सीन का बूस्टर डोज रोगज़नक के खिलाफ प्रतिरक्षा को और मजबूती देने में मदद कर सकती है। समय के साथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है ऐसे में बूस्टर डोज की आवश्यकता होना सामान्य है, इससे लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।



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नोट: यह लेख इंपीरियल कॉलेज लंदन और मार्केट रिसर्च कंपनी इप्सोस मोरी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। यह अध्ययन अभी जर्नल में प्रकाशित नहीं है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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