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डराते कोरोना के केस: देश में तेजी से बढ़ता संक्रमण, क्या चौथी लहर का संकेत? कितनी गंभीर हो सकती हैं इसकी चुनौतियां?

Thu, 28 Apr 2022 04:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले - फोटो : Pixabay
पिछले कुछ हफ्तों से देश में जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमण के मामलों में इजाफा रिकॉर्ड किया जा रहा है, इसके आंकड़े काफी डराने वाले हैं। दैनिक आंकड़ों में तेजी से उछाल दर्ज किया जा रहा है, जिसके आधार पर कुछ रिपोर्ट्स इसे चौथी लहर के संकेत के तौर पर भी दिखा रहे हैं। पिछले 24 घंटे (27 अप्रैल) को देश में 3300 से अधिक नए मामले दर्ज किए गए, इसके साथ सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 17000 से ऊपर पहुंच गई है। रिपोर्ट्स यह भी बताते हैं कि इस बार कोरोना के ज्यादा शिकार बच्चे और कम आयु वर्ग के लोग हो रहे है, जो चिंता और बढ़ाने वाली बात है।

दिसंबर-जनवरी में तीसरी लहर के बाद एक समय ऐसा लगने लगा था जैसे कोरोना से राहत मिल गई हो, इसी बीच ओमिक्रॉन BA.2 और नए एक्सई वैरिएंट के कारण संक्रमण की दर में एक बार फिर से उछाल देखने को मिल रहा है। भारत में, विशेष रूप से देश की राजधानी में कोरोनावायरस की चौथी लहर की आशंका के बीच, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि ओमिक्रॉन और इसके नए वैरिएंट्स को लेकर सतर्कता बरतने की विशेष आवश्यकता है, वरना यह बड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं। आइए समझते हैं कि क्या देश चौथी लहर की ओर बढ़ता जा रहा है?
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ओमिक्रॉन को माना जा रहा है अत्याधिक संक्रामक - फोटो : Pixabay
ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स बढ़ा रहे हैं मुश्किल

भारत में पिछले दिनों सामने आए कोरोना के ज्यादातर संक्रमितों में ओमिक्रॉन वैरिएंट और इसके सब-वैरिएंट्स की पहचान की गई है। इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के निदेशक डॉ एसके सरीन कहते हैं, दिल्ली में पिछले दिनों जिस तरह से संक्रमण के मामलों में उछाल देखा गया है ऐसे में आशंका है कि यहां ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट्स के भी केस हो सकते हैं। दुनियाभर में जिस तरह से ओमिक्रॉन के नए वैरिएंट्स के कारण संक्रामकता दर और तेजी से बढ़ते मामले दर्ज किए जा रहे हैं, वह निश्चित ही भारत के संदर्भ में भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। 
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कोरोना संक्रमण से बचाव बहुत जरूरी - फोटो : istock
विशेष सावधानी की आवश्यकता

डॉ सरीन कहते हैं, वैश्विक स्तर पर जो रिपोर्ट सामने आ रही है उसको लेकर भारत में भी सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। इस समय सभी लोगों को विशेष सावधानी और सतर्कता बरतनी चाहिए, विशेषकर मास्क पहनना बहुत आवश्यक है। अध्ययनों में इस बात की पुष्टि होती है कि अगर आप मास्क पहनकर रखते हैं तो कोरोना के प्रसार को रोकने और संक्रमण से बचाव करने में मदद मिल सकती है।

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कोरोना के एक और लहर की आशंका - फोटो : istock
चौथी लहर की आशंका

जिस तेजी से देश में पिछले कुछ समय से कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिला है, इसने लोगों के मन में चौथी लहर को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस संबंध में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल कहते हैं, कोरोना के बढ़ते केस के आधार पर इतना जल्दी निष्कर्ष निकलना कि यह देश में चौथी लहर का संकेत है, सही नहीं है। फिलहाल कोविड की चौथी लहर की आशंका नहीं है, हालांकि इसके लिए सभी लोगों को व्यक्तिगत तौर पर सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की बहुत आवश्यकता है। अगर कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का सही से पालन किया जाता है तो चौथी लहर को लेकर डरने की जरूरत नहीं है।
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बच्चों में कोरोना का खतरा - फोटो : iStock
बच्चों में खतरे को लेकर विशेषज्ञों ने किया सावधान

कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट को बच्चों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। कम आयु के लोगों में ओमिक्रॉन से संक्रमण के खतरे को जानने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि कोरोना का यह वैरिएंट बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ावा दे सकता है। एक अमेरिकी अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि ओमिक्रॉन संक्रमित कुछ बच्चों में ऊपरी वायुमार्ग में गंभीर संक्रमण देखने को मिला है, यह हृदय गति रुकने का खतरा बढ़ा सकती है। बच्चों में संक्रमण के बचाव को लेकर माता-पिता को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। चूंकि छोटे बच्चों का टीकाकरण भी अभी नहीं हो पाया है ऐसे में इनमें गंभीर संक्रमण का खतरा बना हुआ है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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