फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावधान: इस तरह के खाद्य पदार्थ मानसिक स्वास्थ्य के लिए हो सकते हैं बेहद नुकसानदायक, करें परहेज

Wed, 14 Jul 2021 05:34 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
तनाव में न करें कुछ चीजों का सेवन - फोटो : Social media
मानसिक रोग, मौजूदा समय की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक हैं। विशेषकर कोरोनाकाल में मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं में काफी इजाफा हुआ है। कोरोना के कारण अधिकांश लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं देखने को मिल रही हैं। मानसिक रोग विशेषज्ञों की मानें तो कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को इस तरह से प्रभावित किया है कि आने वाले कुछ सालों तक इसका असर बने रहने की आशंका है।
वहीं दूसरी तरह आहार विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारा भोजन सेहत की स्थिति के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम जिस तरह का भोजन करते हैं वह अपनी प्रकृति के अनुसार हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। कई खाद्य पदार्थ ऐसे हैं जिनका सेवन हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हम अनजाने में इन चीजों को खाते रहते हैं और यह धीरे-धीरे हमारी मानसिक स्थिति को प्रभावित करते रहते हैं। आइए इस लेख में ऐसे ही कुछ खाद्य पदार्थों के बारे में जानते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, सभी लोगों को ऐसी चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
विज्ञापन

2 of 5
अधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन न करें - फोटो : Pixabay
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से बढ़ सकता है खतरा
मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह के स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए आहार विशेषज्ञ सभी लोगों को रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों से परहेज करने की सलाह देते हैं। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का ज्यादा सेवन हृदय के रोग, मधुमेह या मोटापे के जोखिम को बढ़ाने के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकते हैं। मानसिक स्वास्थ्य संगठनों द्वारा किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं का कहना है कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने वालों में चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है। सभी लोगों को सफेद आटा, सफेद ब्रेड, कन्फेक्शनरी उत्पाद, पास्ता आदि का सेवन कम से कम करना चाहिए।
विज्ञापन

3 of 5
एडेड शुगर के इस्तेमाल से करें बचाव - फोटो : getty images
एडेड शुगर वाले खाद्य पदार्थ
आहार विशेषज्ञ कहते हैं, मीठे खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव का कारण बनने के साथ ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करते हैं। कई लोगों में ऐसे खाद्य पदार्थ मूड संबंधी समस्याओं का भी कारण बन सकते हैं। ऐसे में उन सभी खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए जिसमें एडेड शुगर की मात्रा अधिक हो। संरक्षित फलों के रस, जैम, कैचप और सॉस ऐसे ही खाद्य पदार्थों का श्रेणी में आते हैं। इनका ज्यादा समय तक सेवन करना मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

4 of 5
न करें कैफीन का ज्यादा सेवन - फोटो : Social media
न करें कैफीन का ज्यादा सेवन
सामान्यतौर पर माना जाता है कि कैफीन युक्त पेय, तनाव और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं, हालांकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उल्टा है। कैफीन युक्त पेय हमारे स्लीप साइकिल को प्रभावित कर देते हैं जो चिंता, अनिद्रा जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है। कैफीन का हल्का सेवन हानिरहित माना जाता है लेकिन अगर आप इसका दिन में बहुत अधिक सेवन करते हैं तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है। ध्यान रहे, सामान्य चाय, कुछ तरह के चॉकलेट और यहां तक कि फ्लेवर्ड केक में भी कैफीन होता है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
खाने में नमक की मात्रा को करें कम - फोटो : iStock
सोडियम की मात्रा घटाएं
डॉक्टरों के मुताबिक शरीर में सोडियम की मात्रा अधिक हो जाने का असर किडनी और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम पर पड़ सकता है। यह मूड संबंधी विकारों, अवसाद या यहां तक कि गंभीर थकान को भी जन्म दे सकता है। नमक के ज्यादा सेवन के कारण मानसिक समस्याओं को साथ रक्तचाप में वृद्धि जैसी दिक्कतों का भी खतरा हो सकता है। ऐसे में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए भोजन में नमक की मात्रा को कम रखें।

--------------------
नोट: यह लेख मेडिकल वेबसाइट्स से एकत्र की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें