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अलर्ट: नहीं थम रहा जीका वायरस का खतरा, यहां जानें लक्षण से लेकर बचाव के तरीके तक सबकुछ

Wed, 14 Jul 2021 05:08 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जीका वायरस काफी खतरनाक है - फोटो : iStock
डॉ. परवेश मलिक 
फिजिशियन, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एमडी (जनरल मेडिसिन)

Medically Reviewed by Dr. Parvesh Malik

देश में भले ही कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर फिलहाल शांत नजर आ रही है। लेकिन केरल जैसी जगहों पर अब भी कोरोना के मामलों में कमी नहीं देखी जा रही है। इसके अलावा केरल में जीका वायरस का खतरा भी मंडरा रहा है, जिसने हर किसी को अलर्ट कर दिया है। शुरुआत में दो और अब ये मामले बढ़कर लगभग 21 तक पहुंच गए हैं, जो चिंता का विषय है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि जीका वायरस के अब राज्य में 21 मामले हो चुके हैं। ऐसे में कोरोना के बीच जीका वायरस का सामने आना, डॉक्टर्स से लेकर सरकारों तक के लिए किसी परेशानी से कम नहीं है। तो चलिए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव के उपायों के बारे में।
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जीका वायरस - फोटो : pexels
क्या है जीका वायरस?
  • दरअसल, जीका वायरस का संक्रमण का असर पीला ज्वर, डेंगू और वेस्ट नाइल वायरस के बुखार की तरह ही होता है। व्यक्ति में जीका वायरस का संक्रमण एईडीज इजिप्टाय मच्छर के काटने से होता है। यहां आपको बताते चले कि ये वहीं मच्छर है, जिसकी प्रजाति से डेंगू वायरस फैलता है। वहीं, जीका वायरस गर्भवती मां से बच्चे में भी आ सकता है। हालांकि, इस वायरस की चपेट में कोई भी आ सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
जीका वायरस से संक्रमित लोगों में चिकनगुनिया और डेंगू जैसे लक्षण पाए जाते हैं। दरअसल, मच्छर के काटने के दो से सात दिन के बाद व्यक्ति जीका वायरस से संक्रमित होता है। इसके कुछ लक्षण हैं, जिनके बारे में जान लेते हैं। ये लक्षण दिखते ही आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज:-

-बीमार होना
-बुखार आना
-मांसपेशियों में दर्द
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
-सिरदर्द होना
-बदन पर दाने होना
-उल्टी आना या जी मिचलाना
-जोड़ों में दर्द होना।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
आराम करना लाभदायक
  • जीका वायरस को मात देने के लिए अभी किसी तरह की दवा या वैक्सीन नहीं आई है। ऐसे में अगर आपको इस वायरस से बचना है, तो एक तो आपको इसके लिए मच्छरों से खुद का बचाव करना होगा। जहां मच्छर हों वहां से दूर रहें। वहीं, अगर जो लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं उन्हें पर्याप्त रूप से आराम करना चाहिए।

नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है।  

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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