कोरोना से बचाव बहुत जरूरी
- फोटो : Pixabay
तीसरी और चौथी लहर की तुलना
प्रोफेसर चौबे कहते हैं, ऐसी उम्मीद की जा रही है कि यह संभावित लहर, तीसरी लहर से भी कम मामलों वाली हो सकती है। इस बार ज्यादा लोगों के संक्रमित होने की आशंका कम है। यह भी माना जा रहा कि पूरे देश में इसका असर एक साथ नहीं होगा।
देश के अलग-अलग जगहों पर लहर अलग-अलग समय में आ सकती है। कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करके इससे बचाव किया जा सकता है। व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को इसको लेकर सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। कोरोना संक्रमण से बचाव ही फिलहाल एक प्रभावी तरीका माना जा रहा है, इसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे (साइटोजेनेटिक्स लैब, जूलॉजी विभाग) से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।