फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Study: मस्तिष्क में खून का संचार बढ़ाकर अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया के जोखिमों को कम कर सकती है ये दवा

Thu, 08 Feb 2024 07:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
दवा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
अल्जाइमर रोग, मस्तिष्क से संबंधित तेजी से बढ़ती बीमारी है, जिसे डिमेंशिया का प्रमुख कारक माना जाता है। अमेरिका में, लगभग 5.5 मिलियन (55 लाख) लोग इस रोग से प्रभावित हैं और दुनियाभर में इसके 24 मिलियन से अधिक रोगी होने की आशंका है। मस्तिष्क की इस बीमारी के कारण समय के साथ याददाश्त कम होने, विचारों की समस्या, भ्रम की स्थिति हो सकती है। अल्जाइमर का अगर समय पर इलाज न हो पाए तो इसके कारण डिमेंशिया होने का खतरा भी बढ़ सकता है। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में भी इस रोग के मामले पिछले कुछ वर्षों में बढ़े हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जीवनशैली के कई कारक अल्जाइमर का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं, सभी लोगों को इस रोग से बचाव करते रहना चाहिए।

अल्जाइमर रोगियों के इलाज पर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी सफलता मिली है। शोधकर्ताओं ने बताया कि सामान्यौतर पर इरेक्टाइल डिस्फंक्शन या नपुंसकता के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली दवा- वियाग्रा, अल्जाइमर रोग के खतरे को कम करने में मददगार हो सकती है।
विज्ञापन

2 of 5
अल्जाइमर रोग का खतरा - फोटो : Pexel
वियाग्रा से मिल सकता है लाभ

न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन पुरुषों को वियाग्रा या इसी तरह की दवाएं दी गईं, उनमें अल्जाइमर रोग या डिमेंशिया होने का खतरा 18 प्रतिशत कम था। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने उन लोगों में अल्जाइमर का जोखिम 44 प्रतिशत कम पाया, जिन्हें अध्ययन के दौरान 21 से 50 बार वियाग्रा की गोलियां दी गईं। 

शोधकर्ताओं ने बताया, कई देशों में अल्जाइमर रोग के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। अगर संयमित मात्रा में, रोगी की अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को ध्यान में रखते हुए ये दवा दी जाए तो इस मस्तिष्क के खतरे को कम किया जा सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
मस्तिष्क कोशिकाओं पर असर - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए 2.60 लाख से अधिक प्रतिभागियों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया था, जिन्हें इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की समस्या थी। हालांकि उनमें स्मृति हानि या अल्जाइमर की समस्या का कोई सबूत नहीं था। इनमें से आधे से अधिक लोग PDE5 अवरोधक दवाओं (वियाग्रा) का सेवन कर रहे थे। प्रतिभागियों का पांच वर्षों तक फॉलोअप किया गया। 

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. रूथ ब्राउर कहती हैं, ये दवाएं मस्तिष्क में असामान्य प्रोटीन को कम करने में मदद कर सकती है, जो अल्जाइमर रोगियों में अधिक देखी जाती है। 

4 of 5
PDE5 अवरोधक दवाओं का असर - फोटो : pixabay
मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करती हैं ये दवाएं

PDE5 अवरोधक दवाओं को मूल रूप से एनजाइना और उच्च रक्तचाप के इलाज के लिए विकसित किया गया था, लेकिन समय के साथ इसके प्रभावों को देखते हुए इरेक्टाइल डिस्फंक्शन वालों में भी इसका इस्तेमाल किया जाने लगा। जानवरों पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे अल्जाइमर से बचाव में मदद मिल सकती है। PDE5 अवरोधक सीजीएमपी नामक यौगिक के स्तर को बढ़ाते हैं, जो मस्तिष्क कोशिकाओं की रक्षा करने में भी मदद कर सकती है। ऐसे में इसके इस्तेमाल से अल्जाइमर रोग का खतरा कम हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
PDE5 अवरोधक दवाओं पर अध्ययन - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया, PDE5 अवरोधक के इस्तेमाल को समझने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं। यदि PDE5 अवरोधकों से अल्जाइमर में लाभ के प्रमाण मिलते हैं तो इससे पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं को भी मदद मिल सकती है। 

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ता डॉ. इवान कोयचेव ने कहा, अध्ययन के परिणाम महत्वपूर्ण हैं क्योंकि डिमेंशिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हालांकि बिना डॉक्टरी सलाह के इन दवाओं का सेवन नहीं किया जाना चाहिए, इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।


--------------
स्रोत और संदर्भ
Phosphodiesterase Type 5 Inhibitors in Men With Erectile Dysfunction and the Risk of Alzheimer Disease

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें