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Screen Time: मोबाइल में बढ़ रहा है स्क्रीन टाइम तो हो जाएं अलर्ट, गंभीर बीमारियों का खतरा

Fri, 18 Oct 2024 01:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्क्रीन टाइम बढ़ने की समस्या - फोटो : Freepik.com
स्क्रीन टाइम बढ़ने को संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। स्क्रीन टाइम का मतलब मोबाइल-कंप्यूटर या टेलीविजन जैसे स्क्रीन पर बीतने वाला समय है। अगर आप रोजाना इन स्क्रीन्स पर बहुत अधिक समय बिताते हैं तो इसके अल्पकालिक और दीर्घकालिक कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं।

अध्ययनों में पाया गया है कि बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। बच्चों में इस समस्या को तेजी से बढ़ते देखा जा रहा है।

विशेषज्ञ बताते हैं, स्क्रीन्स से निकलने वाली नीली रोशनी आंखों को प्रभावित करती है, ये बच्चों में बढ़ती मायोपिया की समस्या का प्रमुख कारण माना जाता है। इसके अलावा मोबाइल-कंप्यूटर का अधिक इस्तेमाल करने वाले लोगों में चिंता-तनाव जैसी कई प्रकार की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है। अच्छी सेहत के लिए स्क्रीन पर कम से कम समय बिताने की सलाह दी जाती है।
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बच्चों के लिए नुकसानदायक है मोबाइल का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
स्क्रीन टाइम बढ़ने के कई नुकसान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अधिक स्क्रीन टाइम शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याओं जैसे गर्दन और पीठ में दर्द, झुकी हुई शारीरिक मुद्रा और मोटापे का कारण बन सकती है। यह उच्च रक्तचाप जैसे हृदय संबंधी विकारों के जोखिम को भी बढ़ाने वाली समस्या है। इसके अलावा स्क्रीन टाइम अधिक होने से तनाव और चिंता जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों का भी खतरा रहता है।

चूंकि हम सभी मोबाइल और अन्य उपकरणों से घिरे रहते हैं, ऐसे में कैसे जाना जाए कि कहीं आपका स्क्रीन टाइम तो नहीं बढ़ गया है?
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आंखों की समस्याएं - फोटो : freepik.com
आंखों में दर्द और थकान की समस्या

लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने के कारण आंखों में जलन, खुजली, धुंधला दिखने और आंखों में दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसे कंप्यूटर विजन सिंड्रोम भी कहते हैं। मायोपिया की बढ़ती समस्या के लिए भी बढ़े हुए स्क्रीन टाइम को एक कारण माना जाता रहा है। अगर आपको भी आंखों में इस तरह की दिक्कतें हो रही हैं तो सावधान हो जाइए, ये बढ़े हुए स्क्रीन टाइम का संकेत हो सकता है।

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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
नींद में आने लगी है कठिनाई

स्क्रीन टाइम बढ़ने का एक और दुष्प्रभाव नींद पर भी देखा जाता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन नामक हार्मोन के उत्पादन को बाधित करती है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक होता है। इसके कारण आपको अनिद्रा, बार-बार नींद टूटने और गहरी नींद न आने की दिक्कत हो सकती है। अगर कुछ समय से आपको भी नींद में दिक्कत महसूस हो रही है तो संभव है कि ये स्क्रीन टाइम बढ़ने का परिणाम हो।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Freepik.com
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई 

लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में, अत्यधिक स्क्रीन टाइम से उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वे तेजी से ध्यान भटकाने वाली गतिविधियों के आदी हो जाते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और वीडियो गेम्स आदि पर अधिक समय बिताने के कारण भावनात्मक अस्थिरता जैसे अधिक चिड़चिड़ापन, गुस्सा आने जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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