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World Sight Day: युवाओं में बढ़ रही है आंखों के सूखेपन की समस्या, जानिए इसके कारण और बचाव के तरीके

Wed, 11 Oct 2023 08:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंखों में सूखापन की समस्या - फोटो : iStock
Medically Reviewed by-
डा. कमल बी कपूर
(मेडिकल डायरेक्टर)
शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स
अनुभव- 25 वर्ष


हाल के वर्षों में स्मार्टफोन और कंप्यूटर के बढ़े हुए इस्तेमाल के कारण लोगों में आंखों से संबंधित कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का निदान किया जा रहा है। आंखों का सूखापन (ड्राई आइज) ऐसी ही एक समस्या है, जिसके युवा आयु वर्ग के लोग ज्यादा शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक एक-दो दशक पहले तक ड्राई आइज की समस्या को उम्र के साथ होने वाली परेशानी मानी जाती थी हालांकि आंखों के लिए नुकसानदायक कई चीजों के बढ़े हुए चलन के कारण अब बहुत ही कम उम्र के बच्चे भी इस समस्या से ग्रसित पाए जा रहे हैं। 

आंखों का सूखापन (ड्राई आइज) ऐसी स्थिति है जिसमें आंसू से आंखों को पर्याप्त मात्रा में मॉस्चराइज प्राप्त नहीं हो पाता है। आंखों में पर्याप्त मात्रा में आंसू का उत्पादन न होने या  खराब गुणवत्ता वाले आंसू के कारण इसका खतरा बढ़ जाता है। ड्राई आइज के कारण असहजता महसूस होती है और आंखों में चुभन और जलन की दिक्कत बनी रहती है। आंसू, हमारी आंखों की सतह को संक्रमण से भी बचाते हैं। पर्याप्त आंसू के अभाव में आंखों के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस गंभीर समस्या के बारे में विस्तार से जानते हैं। 
 
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आंखों में जलन या चुभन की समस्या - फोटो : iStock
ड्राई आइज के लक्षण
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. कमल बी कपूर बताते हैं जिस तरह से लाइफ स्टाइल से संबंधित समस्याओं के कारण आंखों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में सभी उम्र के लोगों को वर्ष में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए। ड्राई आइज की समस्या युवाओं में काफी सामान्य होती जा रही है, इस समस्या में कई तरह के लक्षणों का अनुभव हो सकता है, जिसका समय पर पहचान कर इलाज आवश्यक होता है।
  • आंखों में चुभन, जलन या खरोंच का एहसास होना।
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।
  • आंखों का अक्सर लाल रहना।
  • कॉन्टैक्ट लेंस पहनने में कठिनाई।
  • रात के समय ड्राइविंग करने में कठिनाई।
  • आंखों से पानी आना, यह जलन के कारण होने वाली प्रतिक्रिया है।
  • धुंधला दिखाई देना।
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ड्राई आइस की समस्या - फोटो : Pixabay
आंखों में सूखापन की समस्या क्यों होती है?
डा. कमल बताते हैं, आंसू के उत्पादन को प्रभावित करने वाली कई तरह की समस्याओं के कारण ड्राई आइज की दिक्कत हो सकती है। आंसू के फिल्म की तीन परतें होती हैं: फैटी ऑयल, जलीय द्रव और म्यूकस। यह संयोजन आम तौर पर आपकी आंखों की सतह को चिकना और साफ रखने में सहायक होती है। इनमें से किसी भी परत की समस्या के कारण आंखों में सूखापन हो सकती है।
आंसू का उत्पादन कई स्थितियों में प्रभावित हो सकता है। उम्र के साथ यह समस्या सामान्य मानी जाती रही है। इसके अलावा कॉन्टैक्ट लेंस के उपयोग, तंत्रिका संबंधी समस्या या लेजर आई सर्जरी का बाद यह समस्या बढ़ सकती है। धूम्रपान करने या स्मार्टफोन और कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल के कारण भी यह समस्या बढ़ गई है। 

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आंखों का परीक्षण कराते रहना आवश्यक - फोटो : Pixabay
ड्राई आइज को कैसे ठीक किया जाता है?
डा. कमल बताते हैं, ड्राई आइज की समस्या के निदान के लिए आंखों और आंसू का परीक्षण किया जाता है। यदि स्थिति सामान्य है तो कुछ आईड्रॉप्स और दवाइयों से इसके लक्षणों को कम किया जाता है। रोगी को कुछ बातों के विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है जैसे- धूल और प्रदूषण से बचाव, बहुत अधिक फोन का इस्तेमाल न करना और आंखों के लिए कुछ व्यायाम आदि। ड्राई आइज को ठीक करने के लिए स्वस्थ लाइफ-स्टाइल और पौष्टिक खान-पान बहुत आवश्यक होता है। 
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आंखों को रखें सुरक्षित - फोटो : iStock
ड्राई आइज की समस्या से कैसे करें बचाव?
डा. कमल बताते हैं, कुछ विशेष सावधानियां बरतकर ड्राई आइज की समस्या से बचाव किया जा सकता है। इसके लिए आहार में हरी सब्जियों, विटामिन-ए वाले आहार को जरूर शामिल करना चाहिए। खेलते समय आंखों की रक्षा करने के उपाय, धूप का चश्मा पहनने, कीटाणुओं से बचाव और स्क्रीन टाइम को कम करके भी इस समस्या से बचाव किया जा सकता है। हेयर ड्रायर, कार हीटर, एयर कंडीशनर या पंखे को सीधे अपनी और रखने से बचें। सबसे खास बात धूम्रपान इस समस्या को बढ़ा सकता है, इसलिए इससे दूरी बना लें। 


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नोट: यह लेख डॉ. कमल बी कपूर (मेडिकल डायरेक्टर, शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स) के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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