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Stroke Risk: 2050 तक 97 लाख लोगों की जा सकती है जान, स्ट्रोक की पहचान के लिए क्या है BE-FAST तरीका

Wed, 11 Oct 2023 07:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्ट्रोक के जोखिम कारक - फोटो : Pixabay
पिछले एक दशक में वैश्विक स्तर पर जिन रोगों के कारण मृत्यु के सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट किए गए हैं, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक की समस्या प्रमुख रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020 में स्ट्रोक के कारण दुनियाभर में 66 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रोक का खतरा युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक किसी को भी हो सकता है, इससे बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया है, समय के साथ स्ट्रोक के जोखिम बढ़ते जा रहे है, इससे मौत के आंकड़ों के बढ़ने की भी आशंका है।

एक हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, आगे दो-ढाई दशक में स्ट्रोक के बड़े जोखिम के तौर पर उभरने की आशंका है, इसको लेकर अलर्ट रहना बहुत जरूरी है।  विश्व स्ट्रोक संगठन और लैंसेट न्यूरोलॉजी कमीशन ने अध्ययन में कहा, 2050 तक निम्न और मध्यम आय वाले देशों (एलएमआईसी) में स्ट्रोक से होने वाली मौतों के आंकड़े 86 प्रतिशत से बढ़कर 91 प्रतिशत हो सकती हैं।
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स्ट्रोक के जोखिम कारक - फोटो : istock
बढ़ सकते हैं मौत के मामले

स्ट्रोक के जोखिमों और आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि साल 2020 में स्ट्रोक से मरने वालों की संख्या 66 लाख लोग थी जिसके 2050 तक 97 लाख तक पहुंचने की आशंका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी स्ट्रोक का प्रमुख जोखिम हो सकती है, इसपर कम उम्र से ही विशेष ध्यान दिए जाते रहने की जरूरत है।

स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित या कम हो जाती है। मस्तिष्क के ऊतकों को रक्त और ऑक्सीजन न मिल पाने की स्थिति में चलने, बोलने और समझने में परेशानी से लेकर लकवा, हाथ-पैर के सुन्न होने और गंभीर स्थितियों में जान जाने का भी जोखिम रहता है। 
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धूम्रपान से स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Pixabay
इन लोगों में स्ट्रोक का खतरा अधिक

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ स्थितियां स्ट्रोक के लिए आपके जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। शोधकर्ताओं ने पाया शराब या धूम्रपान का सेवन करने वालों में स्ट्रोक होने का जोखिम हो सकता है। इसके अलावा अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की समस्या भी आपमें स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है। ये सभी स्थितियां  रक्त वाहिकाओं को क्षति पहुंचाती हैं जिससे आपमें स्ट्रोक का जोखिम अधिक हो सकता है। 

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स्ट्रोक को कैसे पहचानें? - फोटो : istock
स्ट्रोक को पहचानने के लिए क्या है BE FAST तरीका?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, BE FAST ऐसा तरीका है जिससे समय रहते स्ट्रोक का पता लगाया जा सकता है।
  • B (Be watchful) अचानक संतुलन बिगड़ने से सावधान रहें।
  • E (Eyes Problem) एक या दोनों आंखों में अचानक दृष्टि हानि होने या दोहरी दृष्टि का अनुभव।
  • F (Face) व्यक्ति को मुस्कुराने के लिए कहें, चेहरे के एक या दोनों तरफ मांसपेशियों की कमजोरी या लकवा की जांच करें।
  • A (Arms) स्ट्रोक से पीड़ित व्यक्ति की अक्सर एक तरफ की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। उन्हें अपने हाथों को ऊपर उठाने के लिए कहें। यदि उनमें कमजोरी है, हाथ अचानक ढीला होकर नीचे की ओर गिर जाता है तो सावधान हो जाइए।
  • S (Speak). स्ट्रोक के कारण अक्सर व्यक्ति बोलने की क्षमता खो देता है। उन्हें बोलने में दिक्कत या आवाज फंसने की समस्या हो सकती है। 
  • T (Time) इस तरह की समस्याएं हो रही हैं तो ये समय है कि आप तुंरत डॉक्टर के पास जाएं और मदद लें। 
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मस्तिष्क को रखें स्वस्थ - फोटो : Pixabay
स्ट्रोक से बचाव के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रोक से बचाव के लिए जरूरी है कि अपनी लाइफस्टाइल को ठीक रखें। 
  • स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करें। इससे वजन को कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • धूम्रपान-शराब से बिल्कुल दूरी बनाकर रखें। 
  • कोलेस्ट्रॉल-रक्तचाप और मधुमेह को कंट्रोल करें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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