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World Voice Day: आवाज में महसूस कर रहे हैं असामान्य बदलाव? यह कैंसर का हो सकता है संकेत, रहें सावधान

Sun, 17 Apr 2022 06:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आवाज में मदलाव के कारण और संकेत - फोटो : iStock
कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जानलेवा बीमारियों में से एक है, हर साल इसके कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। त्वचा, आंत और मुंह के साथ गले का कैंसर भी वैश्विक स्तर पर काफी बड़ी संख्या में रिकॉर्ड किया जाता रहा है, जिससे बचाव बेहद आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि आमतौर पर गले के कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिसके कारण यह रोग तेजी से बढ़ सकता है। आनुवांशिक कारकों के साथ जीवनशैली का गड़बड़ी और आहार से संबंधित दिक्कतों के कारण इस तरह के कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं।

सामान्यतौर पर गले और मुंह के कैंसर को एक ही समझ लिया जाता है, जबकि यह दोनों अलग-अलग प्रकार के हैं। गले का कैंसर, गले (ग्रसनी) या वाइस बॉक्स (स्वरयंत्र) में विकसित होता है। हमारे शरीर में स्वरयंत्र गले के ठीक निचले हिस्से में होता है, जो गले के कैंसर के लिए अतिसंवेदनशील माना जाता है। वॉयस बॉक्स कार्टिलेज से बना होता है और इसमें वोकल कॉर्ड होते हैं जो बात करते समय आवाज करने के लिए कंपन करते हैं। अगर आपको अपने आवाज में लंबे समय से कुछ असामान्य सा बदलाव महसूस होता आ रहा हो तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से संपर्क करें, यह भी कैंसर का संकेत माना जाता है। आइए आगे इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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गले में कैंसर की समस्या - फोटो : iStock
गले के कैंसर का खतरा

अमेरिकन कैंसर सोसाइटी (एसीएस) के अनुसार, जो लोग धूम्रपान करते हैं या बहुत अधिक शराब पीते हैं, उनमें ऑरोफरीन्जियल कैंसर विकसित होने की आशंका 30 गुना अधिक होती है। पुरुषों में गले के कैंसर के विभिन्न प्रकारों के विकसित होने की आशंका महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में वैसे तो गले के कैंसर का जोखिम कम होता है, हालांकि कुछ स्थितियां आपमें इसका खतरा बढ़ा सकती हैं, जिनको लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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गले में कैंसर की पहचान कैसे करें? - फोटो : iStock
गले के कैंसर के लक्षण

मेडिकल रिपोर्ट्स बताते हैं कि गले के कैंसर की स्थिति में लोगों में कई तरह के लक्षण हो सकते हैं, जिनका बड़ी सावधानी से निगरानी करते रहना आवश्यक है। आमतौर पर ये लक्षण अन्य समस्याओं से मिलते-जुलते हो सकते हैं जिसके कारण लोगों को भ्रम हो जाता है।
  • भोजन को निगलने में परेशानी  (डिस्फेगिया)
  • वजन कम होते रहना।
  • अक्सर गला खराब रहना।
  • आवाज में असामान्य रूप से बदलाव महसूस होना।
  • गला साफ करते रहने की निरंतर आवश्यकता महसूस होना।
  • लगातार खांसी और खांसी के साथ खून आना।
  • गर्दन में सूजन की समस्या
  • घरघराहट की दिक्कत

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धूम्रपान से गले के कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
किन्हें गले के कैंसर का खतरा अधिक होता है?

आनुवांशिक कारकों के साथ सामान्य जीवनशैली की गड़बड़ आदतें गले के कैंसर का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञ सभी लोगों को मुंह की साफ-सफाई और आहार पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह देते हैं, जिससे इससे बचाव किया जा सके। ये स्थितियां जोखिम बढ़ा देती हैं।
  • धूम्रपान या शराब का अधिक सेवन।
  • सुपारी चबाना और गुटखा चबाने की आदत।
  • शरीर का वजन अधिक होना।
  • वृद्धजनों विशेषकर 50 की आयु के बाद इसका जोखिम बढ़ जाता है। 
  • फैंकोनी एनीमिया या डिस्केरटोसिस कोजेनिटा होना जैसी आनुवंशिक सिंड्रोम की समस्या।
  • ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) का संक्रमण होना।
  • मौखिक स्वच्छता का ध्यान न रखना।
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गले में कैंसर का इलाज और रोकथाम - फोटो : istock
गले के कैंसर से बचाव कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जीवनशैली और आहार को स्वस्थ रखने की आदत आपको कई तरह के कैंसर और अन्य बीमारियों के जोखिम से बचा सकती है। धूम्रपान और शराब के अधिक सेवन को गले के कैंसर का प्रमुख कारक माना जाता है, इससे सभी लोगों को बिल्कुल परहेज करना चाहिए।

पोषक तत्वों से भरपूर आहार जिसमें ताजे फल और सब्जियां शामिल हों, ये आपमें कैंसर के जोखिम को कम कर सकती हैं। इसके अलावा प्रोसेस्ड फूड्स और फैट वाली चीजों का सेवन कम करना चाहिए। मौखिक स्वच्छता का ध्यान रखकर और नियमित व्यायाम की आदत, आपको गले के कैंसर से सुरक्षित रखने में सहायक है। 


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स्रोत और संदर्भ
Throat cancer, know the risk

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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