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Covid-19: ओमिक्रॉन संक्रमित रह चुके लोगों में लॉन्ग कोविड का कितना खतरा? अध्ययन में बड़ा खुलासा

Mon, 09 May 2022 06:32 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लाॅन्ग कोविड का खतरा - फोटो : self
कोरोना वायरस ने पिछले दो सालों से अधिक समय में दुनियाभर के देशों को प्रभावित किया है। कोविड-19 के एक के बाद एक नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, जिसके कारण संक्रमण के मामले समय समय पर बढ़ जाते हैं। कई लोग कोरोना की दूसरी और दूसरी लहर में संक्रमण की चपेट में आ गए। लेकिन चिंता की बात यह है कि कोरोना से संक्रमित लोगों में स्वस्थ होने के बाद भी संक्रमण के लक्षण लंबे समय तक पाए जा रहे हैं। एक रिपोर्ट में पता चला है कि शुरुआती संक्रमण से जो लोग ठीक हो चुके थे, उनमें महीनों तक कोविड के लक्षण पाए गए, जिसे लाॅन्ग कोविड या पोस्ट कोविड सिंड्रोम नाम दिया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक डेल्टा वेरिएंट की तुलना में पहली बार कोरोना वायरस के ओमीक्रान वेरिएंट से संक्रमित होने ठीक होने वाले पीड़ितों में चार हफ्ते बाद भी कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं। लॉन्ग कोविड के खतरे को जानने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम के मुताबिक रिकवर कर चुके संक्रमितों में छह महीने से एक साल तक भी लॉन्ग कोविड के लक्षण मौजूद रह सकते हैं। यह रिपोर्ट नेशनल स्टैटिस्टिक्स से सामने आई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई लोगों में लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के गंभीर लक्षण भी हो सकते है। जानिए क्या है लाॅन्ग कोविड या पोस्ट कोविड सिंड्रोम? संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के लिए लॉन्ग कोविड कितना खतरनाक है और क्या है लॉन्ग कोविड के लक्षण?
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लाॅन्ग कोविड कितना खतरनाक - फोटो : amar ujala
लॉन्ग कोविड क्या है?

लॉन्ग कोविड वह अवस्था है, जिसमें कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके रोगियों में संक्रमण के कुछ लक्षण बने रहते हैं जो कि हफ्तों से लेकर महीनों कर रह सकते हैं। यहां संक्रमण से ठीक होने वालों में संक्रमण के लक्षण का हफ्तों तक रहना पोस्ट कोविड सिंड्रोम है।
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लॉन्ग कोविड के लक्षण - फोटो : Amar Ujala
लॉन्ग कोविड के लक्षण

वैसे तो लॉन्ग कोविड के लक्षण लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन पोस्ट कोविड के सबसे आम लक्षणों में सांस फूलना, खांसी-थकान, जोड़ों में दर्द, नींद की समस्या, ब्रेन फॉग और मांसपेशियों में दर्द रहना शामिल है। यूके के ऑफिस ऑफ नेशनल स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक, लॉन्ग कोविड के रोगियों में 58 प्रतिशत को थकान, 42 फीसदी रोगियों को सांस फूलने, 32 फीसदी को मांसपेशियों में दर्द और 31 प्रतिशत रोगियों को ध्यान लगाने में परेशानी होने के लक्षण पाए गए हैं।

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लॉन्ग कोविड का जोखिम किसे? - फोटो : self
लॉन्ग कोविड का जोखिम किसे?

द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना से ठीक हो चुके चार में से तीन लोग एक साल बाद भी किसी न किसी समस्या के शिकार हैं। मोटापे का शिकार, या कोविड के इलाज के दौरान जो लोग वेंटिलेटर पर रहे, उनमें लॉन्ग कोविड के लक्षण देखने को मिल रहे हैं। ब्रिटेन के लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक शोध में पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पोस्ट कोविड समस्याओं का खतरा अधिक है।
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लॉन्ग कोविड कितना खतरनाक - फोटो : पीटीआई
लॉन्ग कोविड कितना खतरनाक

शोध के निष्कर्षों के आधार पर लॉन्ग कोविड को खतरनाक माना जा सकता है। शोध में 2,320 प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया गया, जिसमें 319 लोगों में गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं एक साल से ज्यादा समय से बनी हुई हैं। 179 लोगों में संज्ञानात्मक समस्याओं के मामले पाए गए और एक साल से अधिक समय तक 645 लोगों में हल्के मानसिक और शारीरिक लक्षण देखे गए।
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लॉन्ग कोविड से निजात का तरीका - फोटो : Pixabay
लॉन्ग कोविड से निजात का तरीका

रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापा, व्यायाम ने करने संक्रमण के दौरान गंभीर लक्षण होने और इंफ्लामेटरी  बायोमार्कर सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर में वृद्धि की वजह से लॉन्ग कोविड के लक्षणों को जन्म दे सकती है। इसे ठीक करने के लिए लाइफस्टाइल को सुधारने की जरूरत है। योग, व्यायाम, तैराकी आदि गतिविधियों से शरीर में लचीलापन आएगा और स्वस्थ रह सकेंगे। प्रभावी उपचार के बिना लॉन्ग कोविड के लक्षणों को कम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने की जरूरत है। 
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बच्चों का टीकाकरण - फोटो : अमर उजाला
नोट: यह लेख ऑफिस ऑफ नेशनल स्टेटिस्टिक्स की रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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