पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से कोरोना का संक्रमण पूरी दुनिया के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बना हुआ है। तमाम अध्ययनों में वैज्ञानिक इसे रेस्पिरेटरी डिजीज यानी की श्वसन पथ की बीमारी बताते रहे हैं। हालांकि एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने व्यापक रूप से स्वीकार किए गए इस तथ्य को खारिज करते हुए दावा किया है कि कोरोना रेस्पिरेटरी नहीं, वैस्कुलर डिजीज है। सरल शब्दों में समझें को वैज्ञानिकों का कहना है कि कोविड-19 श्वसन पथ की नहीं रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली बीमारी है।
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया-सैन डिएगो के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना संक्रमितों में जिस तरह के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, उसके आधार पर इसे वैस्कुलर डिजीज माना जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है, कोविड रोगियों में रक्त के थक्के और कोविड-फुट जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं, श्वसन संबंधी बीमारी में इस तरह के लक्षणों का होना असामान्य है। यह समस्या तभी होती है जब व्यक्ति की रक्त वाहिकाओं में कोई दिक्कत हो। ऐसे में कोविड-19 को वैस्कुलर डिजीज के रूप में देखे जाने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानने की कोशिश करते हैं।