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Coronavirus Vaccine: दुनिया की छह सबसे दमदार कोरोना वैक्सीन, जानें क्यों सब एक दूसरे से हैं अलग

Thu, 04 Feb 2021 03:25 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : Amar Ujala
भारत, ब्रिटेन और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान चल रहे हैं। भारत में अब तक 41 लाख 38 हजार से अधिक लोगों को कोविड-19 का टीका लगाया जा चुका है और इसी के साथ दुनिया में सबसे तेजी से 40 लाख लोगों को टीका लगाने के मामले में भारत सबसे आगे हो गया है। वहीं अमेरिका में अब तक ढाई करोड़ से भी अधिक लोगों को टीका लगाया जा चुका है, जबकि ब्रिटेन में भी लाखों लोगों का टीकाकरण हो चुका है। आइए जानते हैं दुनिया की छह सबसे दमदार मानी जा रहीं कोरोना वैक्सीन के बारे में सबकुछ... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मॉडर्ना वैक्सीन 
  • यह एमआरएनए तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। इसमें कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है जिससे शरीर वायरल प्रोटीन बनाने लगता है, लेकिन पूरा वायरस नहीं बनाता। इस तरह शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र वायरस पर हमला करने के लिए तैयार हो जाता है। यह वैक्सीन 94.1 फीसदी प्रभावी है। इसके तीसरे चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसे अब तक अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, इस्रायल, ,स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ ने मंजूरी दी है। इसकी दो खुराक देनी होती है। पहली खुराक देने के 28 दिन के बाद दूसरी खुराक दी जाती है। फ्रिज में इसे 30 दिनों तक रखा जा सकता है, जबकि माइनस 20 डिग्री तापमान पर यह छह महीने तक सुरक्षित रहता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन 
  • मॉडर्ना की तरह यह भी एमआरएनए तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। यह वैक्सीन 95 फीसदी प्रभावी है। इसके भी तीसरे चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसे मंजूरी देने वालों में अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के अलावा स्विट्जरलैंड, बहरीन, सऊदी अरब, यूरोपीय संघ, अर्जेंटीना, चिली, कोस्टा रिका, इक्वाडोर, जॉर्डन, कुवैत, मेक्सिको, पनामा और सिंगापुर शामिल हैं। इसकी भी दो खुराक देनी होती है। पहली खुराक देने के 21 दिन के बाद दूसरी खुराक दी जाती है। इस वैक्सीन को लगभग 75 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन 
  • यह वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। इसे बनाने के लिए पहले वायरस स्ट्रेन को संक्रमणमुक्त किया जाता है और फिर उसके इस्तेमाल से कोरोना वायरस प्रोटीन विकसित किया जाता है। इसके बाद उन प्रोटीन्स के जरिए शरीर में संक्रमण को रोकने लायक इम्यूनिटी विकसित की जाती है। यह वैक्सीन 62 फीसदी प्रभावी है। इसके भी तीसरे चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है। इसे अब तक ब्रिटेन, अर्जेंटीना, भारत और मेक्सिको में इस्तेमाल के लिए मंजूरी मिली है। इसकी भी दो खुराक देनी होती है। दोनों खुराक के बीच चार हफ्तों का अंतर रखना होता है। इसे दो से आठ डिग्री तापमान पर रखा जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सिनोफार्म वैक्सीन 
  • यह इनएक्टिवेटेड (निष्क्रिय) वायरस तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। इसे बनाने के लिए निष्क्रिय हो चुके वायरस यानी जिनमें संक्रमण फैलाने की क्षमता खत्म हो चुकी है, का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से शरीर वायरस से लड़ना सीखता है और उसके खिलाफ इम्यूनिटी विकसित करता है, जिससे बाद में सक्रिय वायरस से लड़ने में मदद मिलती है। इसकी प्रभावकारिता कितनी है, इसको लेकर अभी असमंजस की स्थिति है। वैसे बताया गया है कि यह 79.34 फीसदी प्रभावी है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात में हुए ट्रायल में इसे 86 फीसदी प्रभावी पाया गया है। फिलहाल इसके तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। इसे अब तक चीन के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मिस्र और जॉर्डन ने इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। इसकी भी दो खुराक देनी होती है और दोनों खुराक के बीच तीन हफ्तों का अंतर रखना होता है। इसे दो से आठ डिग्री तापमान पर रखा जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन 
  • यह भी ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन की तरह वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। अभी इसकी प्रभावकारिता के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके दूसरे चरण का ट्रायल पूरा हो चुका है और तीसरे चरण के ट्रायल का डाटा जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। इसकी पहली और दूसरी खुराक की प्रभावकारिता से संबंधित परीक्षण किया जा रहा है। माइनस 20 डिग्री तापमान पर इसे दो साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है, जबकि दो से आठ डिग्री तापमान पर यह वैक्सीन तीन महीने तक सुरक्षित रहेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
गमलेया इंस्टीट्यूट की वैक्सीन 
  • यह भी वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित वैक्सीन है। इसे 91.4 फीसदी प्रभावी बताया गया है, लेकिन अभी इससे संबंधित डाटा जारी नहीं किया गया है। फिलहाल इसके तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। रूस के अलावा इसे बेलारूस, अर्जेंटीना, अल्जीरिया, बोलिविया, फिलिस्तीन और सर्बिया ने इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है। इसकी दो खुराक देनी होती है और दोनों खुराक के बीच तीन हफ्तों का अंतर रखना होता है। इसे माइनस 20 डिग्री तापमान पर रखा जाता है। 
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