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कोरोना वैक्सीन के साइड-इफेक्ट: लोगों को हो रही फेशियल पैरालिसिस की समस्या, अध्ययन में दावा

Thu, 22 Jul 2021 03:46 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, क्लीवलैंड
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कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट - फोटो : iStock
देश में कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के मामलों में काफी हद तक कमी आ गई है और इस बीच टीकाकरण अभियान भी तेजी से चलने लगा है। रोजाना 50 लाख से अधिक टीके लगाए जा रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कुछ अन्य देशों में भी टीकाकरण तेजी से चल रहा है। इस बीच कोरोना वैक्सीन के साइड-इफेक्ट को लेकर भी खूब बातें हो रही हैं। इससे ब्लड क्लॉट यानी खून के थक्के जम जाने के मामले तो सामने आ ही चुके हैं और अब इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला एक साइड-इफेक्ट सामने आ रहा है। दरअसल, कोरोना वैक्सीन लगवाने के बाद कई लोगों में बेल्स पाल्सी यानी फेशियल पैरालिसिस की समस्या देखने को मिल रही है। हाल ही में अमेरिका में हुए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। अध्ययन के मुताबिक, इस समस्या को कोरोना वैक्सीन के दुर्लभ साइड-इफेक्ट के तौर पर दर्ज किया गया है। आइए जानते हैं इस बेल्स पाल्सी और अध्ययन के बारे में...  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या है बेल्स पाल्सी? 
  • बेल्स पाल्सी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें चेहरे के एक तरफ की मांसपेशियां अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती हैं। यह फेशियल पैरालिसिस यानी आधे चेहरे के लकवे का सबसे आम कारण है। इसके कारण व्यक्ति का आधा चेहरा लटक जाता है, जिससे व्यक्ति को बोलने और आंख बंद करने में परेशानी महसूस होने लगती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बेल्स पाल्सी ठीक हो सकती है या नहीं? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि यह एक अस्थायी स्थिति है, जिसके लक्षणों में कुछ दिनों में सुधार आने लगता है। कई मरीजों में इस बीमारी के लक्षण 5-6 महीनों में पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मरीजों में यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना उचित होता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कैसे होती है यह बीमारी? 
  • इस बीमारी का सटीक कारण अभी तक अज्ञात है, लेकिन यह माना जाता है कि जब शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र अधिक प्रतिक्रिया देने लगता है तो उससे चेहरे पर सूजन आ जाती है, जो चेहरे की तंत्रिका को प्रभावित करती है। माना जाता है कि यह बीमारी तब होती है, जब चेहरे की मांसपेशियों को नियंत्रित करने वाली तंत्रिका संकुचित हो जाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या कहता है नया अध्ययन? 
  • नए अध्ययन के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन लेने वालों की तुलना में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में बेल्स पैरालिसिस होने की संभावना अधिक है। दरअसल, शोधकर्ताओं ने कोरोना मरीजों में बेल्स पाल्सी होने के खतरे की तुलना कोरोना वैक्सीन ले चुके लोगों से की, जिसमें यह बात सामने आई। इस अध्ययन को जामा ओटोलरींगोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन के मुताबिक, फाइजर और मॉडर्ना वैक्सीन पर ये परीक्षण किए गए थे। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन बेल्स पाल्सी का कारण बन सकता है या नहीं, अभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता। इसपर अभी और शोध करने की जरूरत है। इसलिए लोग बिना हिचकिचाए वैक्सीन लगवा सकते हैं। 

स्रोत और संदर्भ:  
Association of COVID-19 Vaccination and Facial Nerve Palsy 
https://jamanetwork.com/journals/jamaotolaryngology 

अस्वीकरण नोट: यह लेख जामा ओटोलरींगोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।   
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