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अध्ययन: वैज्ञानिकों ने बनाई कोरोना का नई डीएनए वैक्सीन, दावा- लंबे समय तक रहेगी एंटीबॉडी

Fri, 28 May 2021 03:45 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, ताइपे
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
कोरोना वायरस के खिलाफ दुनियाभर में कई वैक्सीन बनाई जा चुकी हैं, जिनमें से कईयों का इस्तेमाल हो रहा है और कई का अभी ट्रायल चल रहा है। अब ताइवान से कोरोना वैक्सीन को लेकर एक नई और राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, ताइवान में वैज्ञानिकों ने डीएनए पर आधारित कोरोना की वैक्सीन बनाई है, जिसे चूहों और हैम्स्टर (चूहे जैसे ही होते हैं) पर प्रभावी पाया गया है। दावा किया जा रहा है कि डीएनए आधारित यह वैक्सीन चूहों और हैम्स्टर में कोरोना वायरस के खिलाफ लंबे समय तक रहने वाली एंटीबॉडी बनाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, ज्यादातर वायरस में आनुवंशिक सामग्री के रूप में आरएनए या डीएनए रहता है और कोविड-19 वायरस में आनुवंशिक सामग्री के तौर पर आरएनए है और अभी कोरोना के कुछ टीके जो उपलब्ध हैं, वो आरएनए आधारित हैं। इनमें फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन शामिल हैं। हालांकि भारत की प्रमुख दवा निर्माता कंपनी जायडस कैडिला ने जो कोरोना वैक्सीन बनाई है, वह डीएनए आधारित है, जिसका नाम ZyCoV-D है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ताइवान की इस नई कोरोना वैक्सीन को लेकर अध्ययन 'पीएलओएस नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। यह नया अध्ययन एक ऐसी वैक्सीन विकसित होने के बारे में संभावना जताता है, जिसमें मानव कोशिकाओं में घुसने और संक्रमित करने के लिए जिम्मेदार वायरस में मौजूद डीएनए का इस्तेमाल किया गया है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधककर्ताओं ने बताया कि हाल में हुए क्लिनिकल ट्रायल में यह पाया गया कि डीएनए टीका एचआईवी-1, जीका वायरस, इबोला वायरस और इंफ्लुएंजा जैसे वायरस समेत अन्य संक्रमणों के इलाज में सुरक्षित और प्रभावी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन चूहों और हैमस्टर को नई डीएनए आधारित कोरोना वैक्सीन लगाई गई, उनमें कोविड-19 वायरस के खिलाफ लंबे समय तक एंटीबॉडी रही। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ये एंटीबॉडी वैक्सीन लगने के आठ हफ्तों बाद सबसे अधिक बनती हैं। 

स्रोत और संदर्भ:  
DNA vaccination induced protective immunity against SARS CoV-2 infection in hamsterss 
https://journals.plos.org/plosntds/article?id=10.1371/journal.pntd.0009374 

अस्वीकरण नोट: यह लेख 'पीएलओएस नेगलेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीज' नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।  
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