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Coronavirus: इस तरह के कपड़ों पर तीन दिन तक जिंदा रहता है कोरोना वायरस, शोध में खुलासा

Thu, 25 Feb 2021 04:08 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस को दुनिया में आए एक साल से भी अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अभी भी वैज्ञानिक इसके बारे में पूरी तरह नहीं जान पाए हैं। हालांकि इसको लेकर लगातार शोध चल रहे हैं। चूंकि यह वायरस कपड़ों समेत कौन सी सतह पर कितने समय तक जिंदा रहता है, इसको लेकर कई शोध पहले भी हो चुके हैं और अब एक ताजा अध्ययन में यह पाया गया है कि कोविड-19 वायरस सामान्य रूप से पहने जाने वाले कपड़ों पर तीन दिनों तक जीवित रह सकता है। यह अध्ययन ब्रिटेन के लीसेस्टर शहर में स्थित डी मोंटफोर्ट विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किया है। वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन ये जानने के लिए किया कि कोरोना वायरस स्वास्थ्य सेवा से जुड़े उद्योग में आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तीन तरह के कपड़ों पर कैसे व्यवहार करता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि आमतौर पर हेल्थकेयर यूनिफॉर्म में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्रियों में वायरस के संचरण का जोखिम होता है। नतीजों से पता चला है कि पॉलिएस्टर ने उच्चतम संचरण जोखिम उत्पन्न किया। उसपर वायरस तीन दिनों के बाद भी मौजूद था और वो भी अन्य सतहों पर स्थानांतरित करने की क्षमता के साथ। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन के मुताबिक, 100 फीसदी कॉटन पर वायरस 24 घंटे तक रहता है, जबकि शोध के दौरान पाया गया कि पॉलीकॉटन पर वायरस केवल छह घंटे तक ही जीवित रहा। दरअसल, वैज्ञानिकों ने 72 घंटों तक प्रत्येक सामग्री पर वायरस की स्थिरता की निगरानी की। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अध्ययन में 100 फीसदी सूती कपड़े से वायरस को हटाने के लिए सबसे विश्वसनीय वॉश विधि को भी देखा गया। इस दौरान पाया गया कि जब डिटर्जेंट का उपयोग किया गया और तापमान 67 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ गया, तो वायरस पूरी तरह खत्म हो गया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अध्ययन में यह भी पाया गया कि स्वच्छ वस्तुओं को धोए जाने पर क्रॉस-कनटेमिनेशन का कोई खतरा नहीं था, यानी जिन वस्तुओं पर वायरस मौजूद थे, उनके साथ ही स्वच्छ वस्तुओं को भी धोने पर वायरस के मौजूद होने का कोई खतरा नहीं था। 

नोटः यह लेख डी मोंटफोर्ट विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित हुई जानकारी पर आधारित है, जिसमें शोध के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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