नॉटिंघम ट्रेंट यूनिवर्सिटी में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक प्रो. रॉबर्ट डिंगवाल के मुताबिक ये चीजें धीरे-धीरे हमारी आदतों में आ जाएंगी। हम बीमारी और संक्रमण की आशंका को लेकर लोगों से मिलने से कतराएंगे और विकल्प तलाशने लगेंगे। इससे भविष्य में हमारे व्यवहार में बदलाव आना स्वाभाविक है। विशेषज्ञों का कहना है कि हम अपने परिचितों या रिश्तेदारों से भले ही दूरी नहीं बना पाएंगे, लेकिन पहले की अपेक्षा ज्यादा बार गले नहीं मिलेंगे और उनके उतने करीब नहीं जाएंगे, जितना हम पहले जाते थे। ऐसी स्थिति अगर लंबे समय तक बनी रही तो हमारे व्यवहार में बदलाव आने लगेगा।