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कोरोना अलर्ट: मास्क से लापरवाही पड़ सकती है भारी, वैक्सीन ले चुके लोग भी हो रहे संक्रमित

Wed, 23 Jun 2021 02:21 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : iStock
Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi

डॉ. राजन गांधी

जनरल फिजिशियन, चाइल्डकेयर हॉस्पिटल, उजाला सिग्नस हॉस्पिटल
डिग्री- एम.बी.बी.एस, डिप्लोमा सी.एच
अनुभव- 25 वर्ष


कोरोना की दूसरी लहर में भले ही संक्रमण के मामले कम होने लगे हैं, लेकिन साथ ही तीसरी लहर का खतरा भी मंडराने लगा है। इसलिए मास्क, सुरक्षित शारीरिक दूरी और टीकाकरण, तीनों ही चीजें कोरोना से बचाव के लिए बहुत अहम हैं। जब तक देश में वैक्सीन नहीं आई थी, तब तक मास्क को ही 'वैक्सीन' माना जा रहा था और अब जब वैक्सीन आ गई है और बड़ी संख्या में लोगों का टीकाकरण हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं और वैसे लोग भी जो वैक्सीन लगवा चुके हैं। हालांकि इसको लेकर विशेषज्ञ बहुत पहले से कहते आ रहे हैं कि वैक्सीन संक्रमण से 100 फीसदी सुरक्षा तो नहीं दे सकती है, लेकिन गंभीर रूप से बीमार होने से जरूर बचा सकती है। ऐसे में पूरी तरह सुरक्षा पाने के लिए वैक्सीन के साथ-साथ मास्क लगाना भी जरूरी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले हफ्ते ही इस्रायल ने मास्क पहनने से छूट देने वाला पहला देश होने का दावा किया था, जिसका नतीजा ये देखने को मिल रहा है कि अब वहां वैक्सीन ले चुके लोग भी संक्रमित होने लगे हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
मास्क लगाने से छूट देना इस्रायल को पड़ रहा भारी 
  • दरअसल, इस्रायल अपनी आधी से अधिक आबादी का टीकाकरण कर चुका है। इसी को मद्देनजर रखते हुए वहां लोगों मास्क लगाने से छूट दे दी गई, लेकिन इसके बाद अचानक से वहां संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखने को मिल रही है। कहा जा रहा है कि कोरोना का खतरनाक डेल्टा वैरिएंट वैक्सीन ले चुके लोगों को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। अगर भारत की बात करें तो यहां बिना वैक्सीन लगवाए लोग भी आराम से बिना किसी डर के घूम-फिर रहे हैं। ऐसे में यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
टीकाकरण के बाद भी मास्क है जरूरी 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि जब तक देश में 100 फीसदी आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता है, तब तक मास्क पहनना और सुरक्षित शारीरिक दूरी रखने जैसे नियमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। टीकाकरण के बाद भी मास्क जरूरी है। इससे आपका भी बचाव होगा और दूसरों का भी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कौन सा मास्क सबसे सुरक्षित? 
  • विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए सबसे सुरक्षित एन-95 मास्क को माना गया है। अगर आपने एन-95 मास्क लगाया है तो 95 फीसदी तक सुरक्षा मिल सकती है। इसके अलावा सर्जिकल मास्क को भी काफी अच्छा माना जाता है, लेकिन भारत में चूंकि ज्यादातर लोग ढीला मास्क पहनते हैं या उससे नाक को न ढक कर सिर्फ मुंह को ढकते हैं, ऐसे में वायरस के शरीर में प्रवेश करने का खतरा रहता है। इसलिए मास्क पहनें तो सही से पहनें। आप कॉटन का मास्क भी पहन सकते हैं, लेकिन इसकी सुरक्षा कम है, इसलिए डबल मास्किंग की सलाह दी जाती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
डबल मास्किंग कितना कारगर? 
  • बीते अप्रैल महीने में अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने लोगों से डबल मास्किंग यानी एक साथ दो मास्क पहनने की सलाह दी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कोरोना के ड्रॉपलेट्स को रोकने में 90 फीसदी तक मदद मिल सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
डबल मास्किंग का तरीका क्या है? 
  • सीडीसी के मुताबिक, डबल मास्किंग के लिए जरूरी है कि पहले अच्छी तरह से सर्जिकल मास्क पहन लें, जिससे मुंह और नाक दोनों ढके हों और फिर उसके ऊपर कोई भी कॉटन या फिर एक और सर्जिकल मास्क पहन सकते हैं। ध्यान रखें कि दोनों मास्क से नाक और मुंह अच्छी तरह ढके हों। जब भी आप किसी बहुत जरूरी काम से घर से बाहर निकलें तो डबल मास्किंग का उपयोग करें। इससे संक्रमण से बचने की संभावना अधिक होगी। 
नोट: डॉ. राजन गांधी अत्यधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल, कानपुर में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।  
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