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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: डॉक्टरों ने बताया, किस ब्लड ग्रुप वाले को कोरोना का खतरा है ज्यादा?

Wed, 12 May 2021 09:35 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस को दुनिया में आए लगभग डेढ़ साल हो चुके हैं और तभी से दुनियाभर के वैज्ञानिक इसपर शोध कर रहे हैं, जिसमें नई-नई बातें निकल कर सामने आ रही हैं। हाल ही में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च यानी सीएसआईआर ने कोरोना वायरस और ब्लड ग्रुप के बीच के संबंधों को लेकर एक सर्वे किया और उसके नतीजे प्रकाशित किए। इस सर्वे के मुताबिक, एबी और बी ब्लड ग्रुप वाले लोग अन्य ब्लड ग्रुप की तुलना में कोरोना संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, यानी ऐसे लोगों को कोरोना वायरस ज्यादा प्रभावित कर रहा है। अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से बुधवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों से इसी विषय पर जानने की कोशिश की। इस दौरान अपोलो अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मनीष और पटना स्थित आईजीआईएमएस के डॉ. अमीष कुमार ने सभी सवालों के जवाब दिए।  
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
किस ब्लड ग्रुप वाले को कोरोना का सबसे ज्यादा खतरा रहता है? 
  • इस सवाल के जवाब में डॉ. मनीष कहते हैं कि ब्लड ग्रुप और कोरोना के बीच कुछ न कुछ तालमेल तो जरूर है, संक्रमण होने में भी और गंभीर संक्रमण में भी। पिछले साल कुछ रिसर्च सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि ब्लड ग्रुप ओ और बी के मुकाबले ब्लड ग्रुप ए और एबी को कोरोना से थोड़ा ज्यादा खतरा है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ब्लड ग्रुप ओ और बी वाले लोग सावधानी न बरतें और खुले घूमते रहें तो ये बिल्कुल गलत बात होगी। ऐसा नहीं है कि वे संक्रमण से 100 फीसदी सुरक्षित हैं, बल्कि खतरा उन्हें भी है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वहीं, डॉ. अमीष कुमार कहते हैं कि रिसर्च में ऐसा पाया गया है कि ब्लड ग्रुप ए में कोरोना का ज्यादा इफेक्ट दिखता है और इसका कारण ये है कि जो ब्लड ग्रुप ए वाले में एंटी-ए एंटीबॉडी नहीं होते हैं। दरअसल, एंटी-ए एंटीबॉडी कोरोना के स्पाइक प्रोटीन को रोकता है। ब्लड ग्रुप ए के अलावा अन्य ब्लड ग्रुप, जैसे- एबी, बी और ओ वाले में एंटी-ए एंटीबॉडी होते हैं, इसलिए कोरोना इनपर कम प्रभावी होता है।






 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या शाकाहारी लोगों की तुलना में मांस खाने वाले लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा है? 
  • इसके जवाब में डॉ. मनीष कहते हैं कि फूड प्रोडक्ट्स के ऊपर स्टडी करना थोड़ा मुश्किल होता है। मुझे नहीं लगता कि कोरोना को लेकर शाकाहारी या मांसाहारी होने में कोई खास अंतर है, लेकिन हां, अगर कोई डायबिटीज से पीड़ित है और उसका शुगर लेवल बढ़ा हुआ है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है, अगर वो व्यक्ति कोविड से संक्रमित हो जाता है। चूंकि मांसाहारी भोजन प्रोटीन रिच डाइट है, इसलिए आपका शुगर लेवल बहुत ज्यादा हाई नहीं होगा और शाकाहार में अगर आप रोटी-चावल आदि खाते हैं तो आपका शुगर लेवल थोड़ा सा ज्यादा रहेगा। ऐसे में हो सकता है कि उनमें कोरोना का संक्रमण थोड़ा ज्यादा गंभीर हो। इसलिए यह कहा जा सकता है कि शाकाहारी होने में कोरोना का खतरा थोड़ा ज्यादा है, मांसाहारी होने के मुकाबले। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एंटी-इंफ्लेमेट्री यानी फाइबर युक्त डाइट कोरोना में कितना जरूरी है? 
  • डॉ. अमीष कुमार कहते हैं कि फाइबर युक्त डाइट लेना सही होता है, जैसे- अखरोट, उसमें एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण देखे जाते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि जो लोग अखरोट का सेवन करते हैं, उनमें अखरोट नहीं लेने वाले लोगों की तुलना में संक्रमण कम होता है। इसके अलावा हल्दी दूध भी लिया जा सकता है, यह भी एंटी-इंफ्लेमेट्री डाइट में ही आता है। ये फायदेमंद है। 
नोट: यह लेख अपोलो अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. मनीष और पटना स्थित आईजीआईएमएस के डॉ. अमीष कुमार से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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