फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बड़ी कामयाबी: अगले 10 साल में आपको अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया तो नहीं होगा? इस ब्लड टेस्ट से चल जाएगा पता

Sun, 18 Feb 2024 07:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
डिमेंशिया का कैसे पता लगाएं? - फोटो : Pixabay
डिमेंशिया वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर बीमारियों में से एक है, वर्तमान में दुनियाभर में 55 मिलियन (5.5 करोड़) से अधिक लोग इस रोग के शिकार हो सकते हैं। इनमें से 60% से अधिक निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिमेंशिया कोई विशिष्ट बीमारी नहीं है बल्कि ये कई प्रकार की बीमारियों का संयुक्त रूप है।

डिमेंशिया के कारण चीजों को याद रखने, सोचने या निर्णय लेने की क्षमता कम होने और रोजमर्रा के कार्यों को ठीक तरीक से न कर पाने में समस्या हो सकती है। अल्जाइमर रोग को डिमेंशिया का प्रमुख कारक माना जाता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि शारीरिक रूप से निष्क्रियता, धूम्रपान और शराब का सेवन, वजन बढ़ना, रक्तचाप-कोलेस्ट्रॉल बढ़े रहने के कारण संज्ञानात्मक गिरावट और डिमेंशिया का खतरा हो सकता है। इसके जोखिमों को लेकर अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि एक खास प्रकार के ब्लड टेस्ट से डिमेंशिया के खतरे का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
विज्ञापन

2 of 5
डिमेंशिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : istock
ब्लड टेस्ट से डिमेंश्या का चल सकता है पता

नेचर एजिंग जर्नल में इससे संबंधित एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है, जिसमें शोधकर्ताओं ने बताया कि ब्लड टेस्ट की मदद से खून में खास प्रोटीन का आकलन करके किसी व्यक्ति में डिमेंशिया रोग के खतरे को अंदाजा लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस टेस्ट की मदद से ये भी जाना जा सकता है कि अगले एक दशक में तो आपमें डिमेंशिया का खतरा नहीं है?

अध्ययनकर्ता बताते हैं, डिमेंशिया का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है पर समय रहते इसके जोखिमों का पता चल जाए तो इसके जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। इस 'अल्ट्रा अर्ली डिटेक्शन' टेस्ट से डिमेंशिया की रोकथाम में मदद मिल सकती है।
विज्ञापन

3 of 5
ब्लड टेस्ट से कर सकेंगे डिमेंशिया का पता - फोटो : Pixabay
ब्लड में खास प्रोटीन का चला पता

डिमेंशिया के खतरे को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने रक्त में पाए जाने वाले लगभग 1,500 प्रोटीनों का विश्लेषण किया इससे लगभग 15 वर्षों की अवधि में किसी व्यक्ति में डिमेंशिया विकसित होने के जोखिम का अनुमान लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष बताते हैं, पहले के शोध में भी डिमेंशिया और तीन प्लाज्मा प्रोटीनों (जीएफएपी, एनईएफएल और जीडीएफ15) के बीच संबंधों की पुष्टि की गई थी। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एलटीबीपी2 प्रोटीन के बारे में पता लगाया है जो डिमेंशिया के पूर्वानुमान में सहायक हो सकती है।

4 of 5
खून में प्रोटीन की मात्रा - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला? 

इस अध्ययन में 52,645 वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें पहले डिमेंशिया नहीं था। प्रतिभागियों की औसत आयु 58 वर्ष थी और इसमें 54% महिलाएं शामिल थीं। अध्ययन में शामिल लोगों में से 2.7% को अगले 14 वर्षों की औसत अवधि के दौरान इस रोग का शिकार पाया गया। शोधकर्ताओं ने बताया, अध्ययन की शुरुआत में जिन लोगों के ब्लड टेस्ट में एलटीबीपी2 प्रोटीन की पुष्टि की गई थी उनमें से अधितकर लोग एक दशक में डिमेंशिया के शिकार पाए गए। मसलन ब्लड में इस प्रोटीन की मौजूदगी आपके लिए जोखिमों का कारक हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मस्तिष्क की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन के निष्कर्ष में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, वैश्विक स्तर पर बढ़ती इस गंभीर समस्या का पता लगाने में ये खास ब्लड टेस्ट मददगार हो सकती है। पर ये शोध सिर्फ अमेरिकी लोगों पर किया गया है। अश्वेत और अन्य पर्यावरणीय स्थितियों में लोगों में ये कितना प्रभावी है इसको जानने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। 

शोधकर्ता कहते हैं, प्रारंभिक शोध अच्छा संकेत दे रहे हैं। भविष्य में इसकी मदद से समय रहते डिमेंशिया का खतरे का पता लगाना आसान हो सकता है। 


--------------
स्रोत और संदर्भ
Plasma proteomic profiles predict future dementia in healthy adults


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें