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राहत की खबर: कोविड संक्रमितों में वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज हो सकती हैं अधिक प्रभावी, अध्ययन में दावा

Tue, 02 Nov 2021 02:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड एंटीबॉडीज - फोटो : Pixabay
दुनिया के तमाम हिस्सों में एक बार फिर से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। चीन और रूस ने बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कुछ हिस्सों में एक बार फिर से लॉकडाउन का ऐलान कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 से बचाव के लिए वैक्सीनेशन ही सबसे प्रभावी हथियार है। भारत में अब तक 105 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिल चुकी है। इस बीच एक हालिया अध्ययन ने लोगों को राहत दी है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि टीकाकरण करा चुके जिन लोगों को पहले कोरोना का संक्रमण था, उनमें सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी का स्तर अधिक और प्रभावी हो सकता है।

अमेरिका में फाइजर/मॉडर्ना की दोनों खुराक ले चुके 1,960 स्वास्थ्य कर्मियों पर किए गए अध्ययन के बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं। यह अध्ययन इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि वैक्सीनेशन के बाद बनी एंटीबॉडीज की प्रभावशीलता पर लगातार बहस जारी है। आइए आगे की स्लाइडों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज - फोटो : iStock
पहले से संक्रमितों में एंटीबॉडीज अधिक प्रभावी
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 73 ऐसे लोगों को शामिल किया जिनकी पहली खुराक लेने से पहले कोरोना की आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इन लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज देने के एक और तीन माह बाद शरीर में बनी एंटीबॉडीज के स्तर की जांच की गई। इसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि जो पहले से संक्रमित लोगों में वैक्सीन के बाद बनी एंटीबॉडीज का स्तर अन्य लोगों की तुलना में अधिक पाया गया।


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टीकाकरण के बाद एंटीबॉडीज - फोटो : Pixabay
समय के साथ बढ़ती हैं एंटीबॉडीज
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में फेलो और अध्ययन के प्रमुख लेखक डायना झोंग कहते हैं, इस अध्ययन में हमने पाया है कि जिन स्वास्थ्य कर्मियों को वैक्सीनेशन से पहले कोरोना का संक्रमण था, उनमें एमआरएनए की दो खुराक के बाद अन्य लोगों की तुलना में एंटीबॉडी का स्तर अधिक पाया गया। जांच में दूसरी खुराक के एक महीने के बाद अन्य लोगों की तुलना में एंटीबॉडीज का स्तर 14 प्रतिशत, तीन महीने के बाद 19 प्रतिशत और छह महीने के बाद 56 प्रतिशत अधिक पाया गया है।

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प्रभावी एंटीबॉडीज का पता चला - फोटो : Pixabay
संक्रमण के बाद टीकाकरण में अंतराल है बेहतर
अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि टीके की पहली डोज के करीब 90 दिन पहले संक्रमित रह चुके लोगों में एंटीबॉडीज का स्तर अधिक पाया गया है। इसके अलावा जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर और अध्ययन के वरिष्ठ लेखक आरोन मिलस्टोन कहते हैं, अध्ययन के दौरान यह भी पता चला है कि संक्रमण और टीका की पहली खुराक के बीच एक लंबा अंतराल एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे सकता है। फिलहाल गाइडलाइंस के मुताबिक संक्रमण से ठीक होने के 90 दिनों के बाद टीकाकरण कराया जा सकता है। 
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कोरोना संक्रमण का खतरा - फोटो : पीटीआई
संक्रमण का खतरा होगा कम
अध्ययनकर्ता आरोन मिलस्टोन कहते हैं, यह निर्धारित करने के लिए आगे की जांच की आवश्यकता है कि पहले से संक्रमित लोगों में टीकाकरण के बाद संक्रमण को जोखिम कितना हो सकता है? फिलहाल यह निश्चित ही संतोषजनक है कि जिन लोगों को पहले से संक्रमण हो चुका है उन्हें टीकाकरण के बाद कोरोना वायरस से अधिक सुरक्षित माना जा सकता है। कोरोना के दोबारा से बढ़ते मामलों को देखते हुए यह अध्ययन काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।


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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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