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बड़ी मुसीबत: आपको लकवाग्रस्त बना सकता है जीका वायरस, ऐसे लोगों को विशेष सावधान रहने की जरूरत

Tue, 02 Nov 2021 01:37 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जीका वायरस की जटिलताएं - फोटो : iStock
देश में डेंगू के जारी प्रकोप के बीच जीका वायरस के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। कानपुर में अब तक 11 लोगों में जीका संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जीका के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। मच्छरों के कारण फैलने वाले इस रोग के गंभीर मामलों को काफी घातक माना जाता है। विशेषकर गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस का संक्रमण गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, इससे भ्रूण को भी नुकसान पहुंच सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि इस वक्त देश में डेंगू के साथ-साथ जीका के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में लोगों के लिए इनके लक्षणों के बीच अंतर कर पाना काफी कठिन हो रहा है। सामान्यतौर पर डेंगू और जीका दोनों के ही लक्षण मिलते-जुलते होते हैं, ऐसे में जीका के बारे में सभी लोगों को विस्तार से जानने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बारे में जानते हैं। 
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जीका का खतरा - फोटो : istock
जीका वायरस संक्रमण क्या है?
जीका वायरस का संक्रमण, एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर दिन और रात कभी भी काट सकते हैं। ज्यादातर मामलों में जीका का संक्रमण हल्के लक्षणों वाला होता है हालांकि इसके गंभीर मामले शरीर के कुछ अंगों जैसे मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जीका की सबसे ज्यादा जटिलताएं गर्भवती महिलाओं में होती हैं, यह मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। शोधकर्ता जीका वायरस के टीके पर काम कर रहे हैं। अभी के लिए, संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है- मच्छरों के काटने से बचाव।
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जीका के लक्षणों से रहें सावधान - फोटो : iStock
जीका वायरस के क्या लक्षण हैं?
जीका वायरस से संक्रमित अधिकांश लोगों में या तो कोई लक्षण नहीं होते हैं या फिर इसके लक्षण काफी मध्यम स्तर के हो सकते हैं। कुछ लोगों को हल्का बुखार, त्वचा पर चकत्ते और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। दुर्लभ मामलों में जीका वायरस मस्तिष्क या तंत्रिका तंत्र की जटिलताओं का कारण बन सकता है। गंभीर मामलो में इसके कारण गुइलेन-बैरे सिंड्रोम जैसी दिक्कत होती है, जिसमें शरीर लकवाग्रस्त हो सकता है। ऐसे लक्षणों से जीका की पहचान की जा सकती है।
  • हल्का बुखार, त्वचा पर चकत्ते।
  • जोड़ों, विशेष रूप से हाथों या पैरों में दर्द
  • आंखों का लाल हो जाना।
  • मांसपेशियों, सिर और आंखों में दर्द।
  • थकान या बेचैनी।

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गर्भावस्था के दौरान खतरा - फोटो : Pixabay
ऐसे लोगों में होता है ज्यादा जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे तो जीका के ज्यादातर मामले जटिलता पैदा नहीं करते हैं, हालांकि कुछ विशेष स्थितियों में यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस से संक्रमित महिलाओं में गर्भपात, समय से पहले बच्चे के जन्म और जन्म के समय बच्चे की मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था के दौरान जीका वायरस के संक्रमण से शिशुओं (जन्मजात जीका सिंड्रोम) में गंभीर जन्म दोषों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे बच्चों को कई दिक्कतें भी हो सकती हैं। 
  • खोपड़ी का आंशिक विकास, सिर के आकार बहुत छोटा होना (मिरोसेफली)
  • ब्रेन डैमेज और मस्तिष्क के ऊतकों में कमी
  • आंखों से संबंधित दिक्कत।
इसके अलावा जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, जीका उनमें भी गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
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जीका का इलाज - फोटो : iStock
जीका का क्या इलाज है?
जीका की पुष्टि के लिए ब्लड या यूरिन टेस्ट की सलाह दी जा सकती है। रोग की पहचान होने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू होती है। मेडिकल रिपोर्टस के मुताबिक फिलहाल जीका का कोई विशिष्ट उपाचार उपलब्ध नहीं है, रोगियों के लक्षणों के आधार पर इसका इलाज किया जाता है। जीका में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, ऐसे में रोगियों को अधिक से अधिक मात्रा में तरल के सेवन की सलाह दी जाती है। बुखार में खुद से ही दवाइयां लेने की गलती नहीं करनी चाहिए।
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मच्छरों से करें बचाव - फोटो : Istock
जीका से कैसे रहें सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जीका से सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर तरीका है मच्छरों से बचाव। सेंटर फॉर डिजीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक सभी गर्भवती महिलाओं को उन क्षेत्रों की यात्रा करने से बचना चाहिए जहां जीका वायरस का प्रकोप है। इसके अलावा मच्छरों से बचने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें, मच्छरों को भगाने वाले उपाय करें और रात में सोते समय मच्छरदानी की प्रयोग करें। 


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स्रोत और संदर्भ
zika virus and its complications

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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