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अलर्ट : अब काम नहीं कर रहीं एंटीबायोटिक दवाएं, अध्ययन में हुआ खुलासा

Fri, 21 Jan 2022 03:43 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : Istock
मेडिकल जर्नल द लैंसेट जर्नल में एंटीबायोटिक दवाओं के असर को अब तक से सबसे बड़े अध्ययन की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस अध्ययन के मुताबिक, साल 2019 में दुनियाभर में 12 साल से अधिक लोगों को मौत बैक्टीरिया से हुए संक्रमण के कारण हो गई। इस लोगों पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हुआ। हैरानी की बात है कि एंटीबायोटिक के बेअसर होने से हुई मौतों का ये आंकड़ा हर साल मलेरिया और एड्स से मरने वालों की संख्या से ज्यादा है। मेडिकल टर्म में दवाओं के बेअसर होने की इस अवस्था को एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) कहते हैं। अध्ययन की रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि वैस् तो इस स्थिति से हर कोई खतरे में है लेकिन विश्व के गरीब देश पर एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस का प्रभाव अधिक हो सकता है। चलिए जानते हैं क्या है एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने की वजह? एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस क्या है और कितनी खतरनाक है ये स्थिति, प्रभाव व किन देशों पर सबसे अधिक खतरा है?
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बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : Pixabay
एंटीबायोटिक के प्रभाव पर अध्ययन 

एंटीबायोटिक दवाओं के प्रभाव पर अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की एक टीम ने अध्ययन हुआ, उसमें दवाओं के बेअसर होने से मौतों का अनुमान लगाया गया। ये रिपोर्ट 204 देशों में विश्लेषण किए जाने के बाद तैयार की गई है। अध्ययन में कहा गया कि साल 2019 में दुनियाभर में बीमारियों से 50 लाख लोगों की मौत हुई, जिसमें एएमआर की बड़ी भूमिका रही। वहीं 12 लाख लोगों की मौत सीधे सीधे एएमआर के कारण हुई।यानी लगभग 60 साल से ज्यादा लोगों की मौत एएमआर से संबंधित है।  
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बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : iStock
एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस क्या है

द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित स्टडी में बताया गया कि एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) तब होता है, जब बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और कवक में समय के साथ बदलाव होने लगता है। इस स्थिति में बैक्टीरिया पर दवाओं का असर नहीं होता। इसका प्रभाव ये पड़ता है कि संक्रमित होने पर इलाज करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में गंभीर बीमारी के फैलने और मौत का खतरा बढ़ता है।

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बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : iStock
एंटी-माइक्रोबियल रेसिस्टेंस से बचाव

अध्ययन में विशेषज्ञों ने इस स्थिति से बचाव के लिए सलाह देते हुए बताया कि नई दवाओं की व्यवस्था की जाए, जिसके लिए तत्काल निवेश की जरूरत है। वहीं जो दवाएं मौजूद हैं उनका भी समझदारी से उपयोग किया जाए।
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सर्दी जुकाम में करें योग - फोटो : Istock
क्यों एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं हो रहा?

पिछले कुछ सालों में मामूली संक्रमण या बैक्टीरिया होने पर एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग अधिक बढ़ गया है। इस कारण गंभीर संक्रमणों पर एंटीबायोटिक्स का प्रभाव कम होने लगा है। जिन मामूली बीमारियों का इलाज हो सकता था, उससे पीड़ित लोगों की मौत हो रही है। इसकी वजह है कि जिन बैक्टीरिया से ये संक्रमण हो रहे थे वह अब इम्यून हो गए हैं और उन पर इलाज का असर नहीं हो पा रहा। 
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बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : पीटीआई
कोरोनावायरस का एंटीबायोटिक दवाओं पर प्रभाव

अध्ययन के मुताबिक, दुनियाभर में कोरोना काल में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बढ़ा है। ऐसे में एएमआर का खतरा बढ़ने लगा है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य अधिकारियों ने एएमआर को लेकर चेतावनी भी दी थी। उनके मुताबिक,एएमआर एक छिपी हुई महामारी है, जो कोरोना के कारण उभर सकती है।
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बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : iStock
एएमआर का खतरा बच्चों पर ज्यादा

अध्ययन में अस्पतालों के मरीजों के रिकॉर्ड से पता चलता है कि एएमआर का सबसे अधिक असर बच्चों पर रहा। एंटीबायोटिक के बेअसर होने से जो मौत हुई, उनमें हर पांचवी मौत किसी पांच साल से कम उम्र के बच्चे की थी। 

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स्रोत और संदर्भ

Antimicrobial resistance: time to repurpose the Global Fund

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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