वायु प्रदूषण के खतरे
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मेरठ की हवा में घुला जहर
दीपावली से पहले मेरठ की हवा लगातार खराब होती जा रही है। ज्योति पर्व से पहले हवा की गुणवत्ता में गिरावट ने चिंता बढ़ा दी है। 16 अक्तूबर को मेरठ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 81 था, जो बृहस्पतिवार को बढ़कर 281 पर पहुंच गया। छह दिन में एक्यूआई में 200 अंकों की वृद्धि हुई है।
पीएम 2.5 और पीएम 10 के खतरे
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पीएम 2.5 और पीएम 10 दोनों ही हवा में मौजूद छोटे-छोटे कण होते हैं, जो धूल-धुएं, वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण कार्य और ईंधन जलने जैसी प्रक्रियाओं से निकलते हो सकते हैं। इन कणों का आकार जितना छोटा होता है, उनके सांस के जरिए शरीर के अंदर गहराई तक पहुंचने की आशंका उतनी अधिक हो सकती है। यही वजह है कि पीएम 2.5 को स्वास्थ्य के लिहाज से विशेष चिंता का विषय माना जाता है। हालांकि, PM 10 थोड़े बड़े आकार के होते हैं फिर भी इससे सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
पीएम 2.5
- ये बेहद बारीक कण होते हैं। इसका आकार 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं। इतना ही नहीं कुछ कण खून के संचार में पहुंच कर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी जा सकते हैं। यही कारण है कि इससे हृदय और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है।
पीएम 10
- ये पीएम 2.5 से अपेक्षाकृत बड़े कण होते हैं, जिनका 10 माइक्रोमीटर तक हो सकता है। ये मुख्यरूप से धूल, परागकण और सड़क या निर्माण कार्य से उड़ने वाले कण होते हैं। इनसे नाक, गले और श्वसन तंत्र में जलन का खतरा देखा जाता रहा है। कुछ कण फेफड़ों तक भी पहुंच सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, जबकि बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में प्रदूषण के दुष्प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। इसी तरह से गर्भवती महिलाओं और हृदय या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों को भी प्रदूषण के दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए।