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AIIMS Study: कैंसर रोगी के देखभालकर्ताओं में बढ़ रही हैं ऐसी दिक्कतें, जीवन की गुणवत्ता पर हो सकता है बुरा असर

Tue, 16 Aug 2022 07:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैंसर रोगी के देखभाल में सावधानी बरतने की जरूरत - फोटो : pixabay
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में लोगों में जारूकता बढ़ी हुई देखने को मिल रही है जोकि अच्छे संकेत हैं, हालांकि अभी भी बड़ी आबादी इससे संबंधित स्टिग्मा और रूढ़ियों की शिकार है, जिसके कारण समस्याओं का समय पर सही निदान और इलाज कठिन हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सभी लोगों को विशेष ध्यान रखना चाहिए, विशेषकर यदि आप किसी मनोरोगी या गंभीर बीमारी के शिकार लोगों की सेवा में लगे हुए हैं तो इस बात का ध्यान रखना और भी आवश्यक हो जाता है।

प्रतिकूल परिस्थितियां कई प्रकार से हमारी मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकती हैं। इसी से संबंधित एम्स पटना के डॉक्टरों ने एक अध्ययन में पाया कि कैंसर से पीड़ित लोगों की देखभाल करने वाले परिवार के सदस्यों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है, हालांकि इस तरह की समस्याओं को ज्यादार मामलों में अनदेखा कर दिया जाता है। समय के साथ यह समस्या गंभीर रूप भी ले सकती है जिसके कारण व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता और जिस रोगी की वह देखभाल कर रहा है, उसका देखभाल दोनों प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप ऐसे किसी रोगी की देखभाल कर रहे हैं तो इस दौरान किसी भी तरह से अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें, विशेषतौर पर यदि आपको मानसिक स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतों का अनुभव हो रहा है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
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रोगी के देखभालकर्ताओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Pixabay
कैंसर रोगियों के केयरटेकर्स पर अध्ययन

डिपार्टमेंट ऑफ रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, पटना एम्स के डॉक्टर्स ने कैंसर रोगियों की देखभाल करने वालों के जीवन की गुणवत्ता का निर्धारण करने के लिए जुलाई 2020 से मार्च 2021 तक एक अध्ययन किया। इसके लिए देखभालकर्ता 350 प्रतिभागियों को शामिल किया गया जिनमें से 264 को अध्ययन के अंतिम विश्लेषण के लिए योग्य पाया गया।

प्रतिभागियों की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानने के लिए शोधकर्ताओं ने उनसे देखभाल के दौरान दिनचर्या में आए व्यवधान, स्थिति को किस तरह से सकारात्मक रूप से संभाला और इस दौरान आर्थिक रूप से किस तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, इस तरह के करीब 31 प्रश्न पूछे। शोध के अंत में विशेषज्ञों को हैरान कर देने वाली बातें समझ आईं।
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रोगी के देखभालकर्ताओं की मनोस्थिति पर असर - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

इंटरनेशल पीर-रिव्यूड जर्नल 'कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च कम्युनिकेशंस' में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि आधे से अधिक देखभालकर्ताओं की मनोस्थिति इस दौरान प्रभावित हुई है। डॉ अमृता राकेश के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में कैंसर रोगियों के केयरटेकर्स ने कई अन्य तरह की समस्याओं के बारे में भी बताया।

डिपार्टमेंट ऑफ रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ अभिषेक शंकर बताते हैं, प्रतिभागियों में से  54 फीसदी इस कदर परेशान हो गए थे कि उन्हें कैंसर रोगी बोझ की तरह लगने लगे थे, वहीं 55 प्रतिशत लोगों ने इलाज के लिए आर्थिक समस्याओं को चिंता का प्रमुख कारण माना।

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देखभालकर्ताओं की जीवन के गुणवत्ता पर असर - फोटो : Pexels
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

डॉ अभिषेक कहते हैं, प्रतिभागियों से बात करने पर पता चला कि इनमें से लगभग 62 प्रतिशत लोगों ने महसूस किया कि देखभाल की तमाम व्यस्तताओं के कारण उनकी दिनचर्या पर नकारात्मक असर हुआ है, वहीं 38 प्रतिशत लोगों ने बताया कि समय के साथ बदली हुई स्थिति के साथ अब वह सहज हो गए हैं।

इस अध्ययन के प्रमुख लेखकों में से एक डॉ राकेश कहते हैं, कैंसर रोगियों की देखभाल करने वालों में जीवन की खराब गुणवत्ता और मनोवैज्ञानिक संकट का मजबूत संबंध देखने को मिला है।
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विशेषज्ञों के अनुभव जानिए - फोटो : istock
मनोरोग विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

रोगियों के देखभालकर्ता/परिजनों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में समझने के लिए हमने मनोरोग विशेषज्ञों से संपर्क किया। इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज दिल्ली में मनश्चिकित्सा के प्रोफेसर डॉ ओमप्रकाश बताते हैं, यह सही है कि कैंसर रोगियों की देखभाल करने वालों में कई तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों और जिम्मेदारी से उत्पन्न तनाव के कारण जीवन की खराब गुणवत्ता के मामले देखे जाते रहे हैं। ऐसे लोगों में अक्सर अवसाद, चिंता, नींद की समस्या और रोगी के जीवन को लेकर मन में चल रही उथल-पुथल के कारण खराब मनोस्थिति की समस्या देखी जाती रही है। इस तरह के मामलों पर समय रहते विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता होती है।

कैंसर रोगियों के उपचार और उनके स्वास्थ्य सुधार से जुड़ी रहने वाली मनोचिकित्सक डॉ विधि एम. पिलानिया बताती हैं, कैंसर रोगियों के देखभालकर्ताओं में मूड विकारों के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। मनोरोग से इतर इसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे परिवार का जो अकेला कमाने वाला था, वही कैंसर का शिकार हो गया है, इलाज के लिए पैसों का इंतजाम न हो पाने जैसी परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर देती हैं। जिन परिवारों में किसी को कैंसर है उनमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर देखा जाता रहा है। इन स्थितियों का मूल, कैंसर को लेकर मन में डर और आर्थिक समस्याओं को माना जा सकता है। 
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मानसिक सेहत को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : istock
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

कैंसर रोगी के देखभालकर्ताओं में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं और इसमें सुधार के प्रयास के बारे में अध्ययन की सह लेखक और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ प्रीतंजलि सिंह ने कहती हैं, कैंसर के रोगियों का इलाज करते समय उनके केयरटेकर्स के स्वास्थ्य पर भी चिकित्सकों को ध्यान देने की आवश्यकता है। देखभाल करने वालों के जीवन की गुणवत्ता का उनके रोगियों के स्वास्थ्य और इलाज के समग्र प्रबंधन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। देखभालकर्ताओं को स्वयं भी मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देते रहना चाहिए क्योंकि परिस्थितियां इस दौरान कई प्रकार से प्रतिकूल हो सकती हैं। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या का अनुभव होता है तो इस बारे में शुरुआती स्थिति में ही डॉक्टर्स से परामर्श लेना आवश्यक हो जाता है। रोगी के बेहतर स्वास्थ्य सुधार के लिए, केयरटेकर्स का स्वस्थ रहना अति आवश्यक है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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