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Health Tips: माता-पिता में से किसी को भी है डायबिटीज, तो आप भी अभी से जीवनशैली में कर लें ये सुधार

Tue, 16 Aug 2022 12:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज को कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : iStock
डायबिटीज की समस्या को विशेषज्ञ गंभीर 'साइलेंट किलर' बीमारियों के रूप में वर्गीकृत करते हैं, क्योंकि इसके कारण शरीर के कई अंगों को समय के साथ क्षति पहुंचने का खतरा हो सकता है। डायबिटीज वाले रोगियों में किडनी, लिवर और आंखों की समस्या होना काफी सामान्य माना जाता है, इस तरह की दिक्कतों से बचे रहने के लिए सभी लोगों को ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है।

डायबिटीज का खतरा आनुवांशिक भी होता है, यानी कि अगर आपके माता-पिता में से किसी भी को डायबिटीज है तो आपमें भी इसके विकसित होने का जोखिम हो सकता है, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

यदि आपमें भी डायबिटीज का आनुवांशिक जोखिम है तो अभी से ही बचाव के उपायों का पालन करके आप भविष्य में खुद को इस बीमारी के जोखिम से सुरक्षित रख सकते हैं। चूंकि लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण युवाओं में भी इस गंभीर रोग का खतरा बढ़ता जा रहा है ऐसे में इससे सुरक्षित रहने के उपाय करना बहुत आवश्यक हो जाता है। आइए जानते हैं कि यदि आपमें मधुमेह का आनुवांशिक जोखिम है तो इस खतरे से बचे रहने के लिए किन बातों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए?
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डायबिटीज की नियमित जांच कराते रहना जरूरी - फोटो : iStock
बॉडी चेकअप कराते रहना जरूरी

मधुमेह को मुख्यरूप से लाइफस्टाइल और मेटाबॉलिज्म से संबंधित बीमारी के रूप में जाना जाता है। ऐसे में यदि आपमें इसका आनुवांशिक खतरा है तो लाइफस्टाइल को ठीक रखना बहुत जरूरी हो जाता है। अपने जोखिम कारकों को समझते हुए हर छह महीने पर पूरे शरीर की जांच कराते रहें, जिससे किसी भी तरह की पनपती समस्या को बढ़ने से पहले ही पहचाना जा सके। ऐसा करके आप डायबिटीज के जोखिमों से बचे रह सकते हैं। वार्षिक रूप से शारीरिक और आंखों की जांच के अलावा, वर्ष में दो से चार मधुमेह की जांच कराना सुनिश्चित करें।
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डायबिटीज में आहार का विशेष ध्यान रखना आवश्यक - फोटो : Istock
आहार पर विशेष ध्यान रखें

डायबिटीज के संभावित जोखिम से बचे रहने के लिए सभी लोगों को आहार को संतुलित और पौष्टिक बनाए रखना जरूरी होता है। भोजन में हरी सब्जियों, करेला, मौसमी फलों को शामिल करें। चीनी का सेवन कम से कम करें, संभव हो तो न करें। इसके अलावा समय पर भोजन करना सुनिश्चित करना भी बहुत आवश्यक माना जाता है। दो मील के बीच में 3-4 घंटे से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए।

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डायबिटीज में योग से मिलता है लाभ - फोटो : istock
नियमित व्यायाम बहुत आवश्यक

यदि आप डायबिटीज के शिकार हैं या नहीं भी हैं, दोनों ही स्थितियों में नियमित रूप से व्यायाम की आदत बनाना बहुत आवश्यक है। योग-व्यायाम, शारीरिक निष्क्रियता को कम करते हैं जिससे डायबिटीज का जोखिम कम हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि रोजाना व्यायाम करने वालों की तुलना में, व्यायाम न करने वालों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने का जोखिम अधिक होता है।
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तनाव का डायबिटीज में असर - फोटो : Pixabay
तनाव-नींद पर दें ध्यान

तनाव और नींद की कमी, दोनों ही स्थितियां आपमें मधुमेह विकसित होने का कारण बन सकती हैं। सभी लोगों को रात में 6-8 घंटे की निर्बाध नींद लेना बहुत आवश्यक होता है, यह तनाव को भी कंट्रोल करने में आपके लिए सहायक है। इसके अलावा यदि आपमें चिंता-तनाव की समस्या अधिक रहती है तो योग-मेडिटेशन को प्रयोग में लाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। तनाव-नींद पर ध्यान देकर डायबिटीज के खतरे को कम किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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