फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चमकी बुखार: अधिक गर्मी और नमी के मौसम में फैलती है यह बीमारी, बच्चों में ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान

Tue, 01 Jun 2021 04:26 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
चमकी बुखार - फोटो : iStock
कुछ साल पहले बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी नाम के बुखार की चपेट में आकर सैकड़ों बच्चों ने अपनी जान गंवा दी थी। इनमें से अधिकतर बच्चों की मौतें हाइपोग्लाइसीमिया या लो ब्लड शुगर के कारण हुई थीं। दरअसल, आमतौर पर हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण दिमागी बुखार के मरीजों में दिखते हैं। हालांकि मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार के मामले अक्सर आते रहते हैं, कभी कम तो कभी ज्यादा। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-4 के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015-16 में बिहार में पांच साल से कम उम्र के 48 फीसदी बच्चे दिमागी बुखार के कारण मौत का शिकार हो गए थे। इसलिए इस बीमारी से सतर्क रहने की जरूरत है। इस बीमारी को मस्तिष्क ज्वर या एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम या जापानी इंसेफ्लाइटिस भी कहा जाता है। चूंकि यह गंभीर बीमारी है, जो अधिक गर्मी और नमी के मौसम में फैलती है, ऐसे में बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर सतर्क किया है और इसकी रोकथाम के उपाय बताए हैं। आइए जानते हैं कि इस बीमारी से कितने साल तक के बच्चे प्रभावित हो सकते हैं, इसके लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं? 
विज्ञापन

2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्यों कहा जाता है चमकी बुखार? 
  • दरअसल, बोलचाल की भाषा में एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम को चमकी बुखार कहा जाता है। इसकी वजह ये है कि इससे ग्रस्त मरीज का शरीर अचानक सख्त हो जाता है और मस्तिष्क और शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है, आम बोलचाल की भाषा में इसी ऐंठन को चमकी कहा जाता है। 
विज्ञापन

3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कौन हो सकता है चमकी बुखार का शिकार? 
  • बिहार के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, एक से 15 साल तक के बच्चे इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं। इम्यूनिटी कमजोर होना इसकी एक वजह हो सकता है। बहुत ज्यादा गर्मी और नमी के मौसम में इस बीमारी की तीव्रता काफी बढ़ जाती है। 

4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
चमकी बुखार के लक्षण क्या हैं? 
  • चमकी बुखार से पीड़ित बच्चे को लगातार तेज बुखार रहता है, शरीर में ऐंठन होती है। इसके अलावा कमजोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश भी हो सकता है। कभी-कभी तो शरीर सुन्न भी हो जाता है और झटके लगते रहते हैं। इन लक्षणों पर ध्यान देने और डॉक्टर से संपर्क कर सही समय पर इलाज की जरूरत होती है। 
विज्ञापन

5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
चमकी बुखार से बचने के लिए क्या सावधानी बरतें? 
  • चूंकि गर्मी के मौसम में फल हो या खाना, जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए ध्यान रखें, बच्चों को ऐसी चीजों का सेवन न करने दें। साथ ही बच्चों को गंदगी से दूर रखें, खाना खाने से पहले और बाद में हाथों को अच्छी तरह से धुलाएं। बच्चों को साफ पानी पीने के लिए दें। इसके अलावा सबसे जरूरी बात कि उन्हें बाहर धूप में खेलने से मना करें। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ये सावधानियां भी हैं जरूरी 

बिहार के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, मस्तिष्क ज्वर के रोकथाम में इन तीन बातों का ध्यान रखें: 
  • बच्चे को रात में सोने से पहले भरपेट खाना जरूर खिलाएं 
  • रात के बीच में और सुबह उठते ही देखें कि कहीं बच्चा बेहोश या उसे चमकी तो नहीं 
  • बेहोशी या चमकी दिखते ही आशा को सूचित कर तुरंत 102 एंबुलेंस या उपलब्ध वाहन से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं 
स्रोत और संदर्भ: 
 

अस्वीकरण नोट: 
यह लेख बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई जानकारी और उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के डॉ. परवेश मलिक से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें