फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Heart Problem: अभिनेता विकास सेठी की कार्डियक अरेस्ट से मौत, जानिए हार्ट अटैक से कितनी अलग है ये समस्या

Sun, 08 Sep 2024 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
विकास सेठी - फोटो : instagram
टेलीविजन के मशहूर अभिनेता विकास सेठी की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई, वह 48 साल के थे। 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'कहीं तो होगा' और 'कसौटी जिंदगी की' में अपनी भूमिकाओं के लिए मशहूर अभिनेता की मौत से प्रशंसकों को सदमा लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विकास लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इस खबर ने एक बार फिर से बढ़ते हृदय रोगों के बारे में लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

अभिनेता का मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। अक्सर लोग कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक में कंफ्यूज रहते हैं, कई लोग इसे एक ही मानते हैं। जबकि असल में ये दो अलग-अलग स्थितियां हैं।

आइए जानते हैं कि इनमें क्या अंतर है? और किस प्रकार से हृदय की इन घातक समस्याओं से बचाव किया जा सकता है?
विज्ञापन

2 of 5
हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : istock
हृदय रोगों की गंभीर स्थितियां 

हृदय रोगों की गंभीर स्थितियां जैसे हार्ट फेलियर, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। हालांकि ये सभी अलग-अलग तरह से हृदय को प्रभावित करती हैं। अधिकतर लोग इन्हें एक ही समस्या मान लेते हैं। कहीं आप भी उनसे तो नहीं हैं?

सडेन कार्डियक अरेस्ट (एससीए) अचानक से दिल की सभी गतिविधियों के बंद होने के कारण होता है। इसमें सांस बंद हो जाती है और व्यक्ति बेहोश हो जाता है। तत्काल उपचार न मिल पाने की स्थिति में कार्डियक अरेस्ट जानलेवा हो सकती है।
विज्ञापन

3 of 5
हार्ट अटैक - फोटो : istock
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?

हार्ट अटैक, कोरोनरी धमनियों के अवरुद्ध हो जाने के कारण होने वाली समस्या है। यदि इस स्थिति को अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो हृदय तक रक्त का प्रवाह रुक जाता और पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है। यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। वहीं कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब व्यक्ति का हृदय रक्त को पंप करना ही बंद कर देता है। इस स्थिति में रोगी सामान्य रूप से सांस नहीं ले पाता है। यह दोनों ही स्थितियां जानलेवा मानी जाती हैं। 

4 of 5
कार्डियक अरेस्ट का जोखिम - फोटो : istock
कार्डियक अरेस्ट और इसका जोखिम

कार्डियक अरेस्ट का सामान्य कारण हृदय गति में आने वाली अनियमितता को माना जाता है। हृदय की विद्युत प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही होती है, तब यह समस्या हो सकती है। इस स्थिति में सीने में दर्द, दिल की धड़कन में अनियमितता, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी या चक्कर आने जैसी समस्या हो सकती है।

विशेषज्ञ कहते हैं, समय पर अगर रोगी को सीपीआर दे दिया जाए तो उससे जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। सीपीआर ऐसी तकनीक है जिसमें हृदय की धड़कन को जारी रखने के लिए छाती को दबाया जाता है। हालांकि हार्ट अटैक की तुलना में कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में सीपीआर के प्रभावी होने की संभावना थोड़ी कम होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
सीपीआर से बच सकती है जान - फोटो : freepik.com
किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कार्डियक अरेस्ट होने पर तुरंत सीपीआर देना चाहिए। अंगों में रक्त प्रवाह बढ़ाने के लिए छाती को दबाने की ये तकनीक जान बचा सकती है। इसके अलावा रोगी को जितनी जल्दी हो सकते आपातकालीन उपचार उपलब्ध कराएं। जिन लोगों को पहले से हार्ट की समस्या रही है उन्हें इस तरह के खतरे से बचाव के बारे में पहले से अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।


--------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें