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कोरोना की तीसरी लहर: देश की इतनी फीसदी आबादी को माना जा सकता है सुरक्षित, स्वास्थ्य संगठन का बड़ा दावा

Thu, 22 Jul 2021 12:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस की तीसरी लहर का खतरा - फोटो : iStock
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले और तीसरी लहर को लेकर जताई जा रही आशंका लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि इन सबके बीच भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक राहत भरी जानकारी दी है। आईसीएमआर ने हालिया सीरो सर्वेक्षण के आधार पर बताया है कि देश में करीब 68 फीसदी लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं। इस आधार पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में आने वाली संभावित कोरोना की तीसरी लहर का असर काफी कम हो सकता है।
जून-जूलाई में किए गए इस सर्वेक्षण में यह जानने की कोशिश की गई कि देश में अब तक कितने लोगों में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं, हालांकि जो आंकड़े सामने आए हैं उनमें यह अंतर स्पष्ट नहीं है कि लोगों में एंटीबॉडीज कोरोना संक्रमण के कारण विकसित हुई हैं या वैक्सीनेशन के कराण। 
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कोरोना संक्रमण (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : pixabay
21 राज्य के लोगों पर किया गया सर्वे
देश के 21 राज्यों के 70 जिलों के 28,975 लोगों के बीच यह सर्वे किया गया, इन लोगों में 7,252 स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल थे। इन सभी लोगों में से 62.2 प्रतिशत का टीकाकरण नहीं हुआ था जबकि 24.8 फीसदी लोगों को वैक्सीन की एक खुराक और 13 फीसदी लोगों को दोनों खुराक मिल चुकी थी। सर्वे के दौरान पाया गया कि वैक्सीन की एक खुराक लेने वालों में सेरोपोसिटिविटी दर 81 प्रतिशत और दोनों खुराक लेने वालों में 89.8 प्रतिशत थी। 
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शरीर में विकसित हो रही हैं एंटीबॉडीज (प्रतीकात्मक) - फोटो : Pixabay
ज्यादातर लोगों में पाई गईं एंटीबॉडीज
सीरो सर्वेक्षण की रिपोर्ट के 6 से 9 साल के 57.2 फीसदी जबकि 10 से 17 साल के 61.6 फीसदी बच्चों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज पाई गई हैं। 18 से 44 साल के 66.7 फीसदी, 45 से 60 साल के 77.6 फीसदी जबकि 60 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में 76.7 फीसदी लोगों के शरीर में एंटीबॉडी पाई गई हैं। हालांकि सर्वे में यह अंतर स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लोगों के शरीर में यह एंटीबॉडीज कोरोना संक्रमण की वजह से विकसित हुई हैं या फिर टीकाकरण की वजह से। फिलहाल इन लोगों को तीसरी लहर से सुरक्षित माना जा रहा है।

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वायरस के खिलाफ रक्षात्मक एंटीबॉडीज (प्रतीकात्मक) - फोटो : iStock
40 करोड़ लोगों पर खतरा अब भी बरकरार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने बताया कि इस सर्वे से प्राप्त नतीजों से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अबतक देश की दो-तिहाई आबादी में वायरस के खिलाफ रक्षात्मक एंटीबॉडीज विकसित हो चुकी हैं। हालांकि अभी भी एक तिहाई आबादी यानी करीब 40 करोड़ लोगों में एंटीबॉडी नहीं पाई गई हैं, जिसका यह मतलब है कि इन लोगों में कोरोना की तीसरी लहर का खतरा अधिक हो सकता है। जिन राज्यों के लोगों में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज नहीं विकसित हो पाईं हैं उन्हें विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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कोविड से बचाव के नियमों का करते रहें पालन - फोटो : Pixabay
कोविड से बचाव के नियमों का पालन करना आवश्यक
डॉ. बलराम भार्गव कहते हैं, एंटीबॉडीज विकसित करने को लेकर प्राप्त आंकड़े सुकून देने वाले हैं, हालांकि हमें फिर भी सावधानी बरतने में कोई लापरवाही नहीं दिखानी चाहिए। सभी लोगों को लगातार कोविड से बचाव के नियमों का पालन करते रहना चाहिए, भले ही आपको वैक्सीन लग चुकी है। कोरोना से सुरक्षित रहने की जिम्मेदारी आपको खुद लेनी चाहिए, किसी प्रकार के भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें क्योंकि वहां से संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक हो सकता है।

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नोट: यह लेख भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हालिया सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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