Medically Reviewed by-
डॉ विक्रमजीत सिंह
(डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन)
आकाश हेल्थकेयर, दिल्ली
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के एक बार फिर से बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने की अपील कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों की मानें तो अब तक देश के सिर्फ चार फीसदी लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज मिल पाई हैं, जबकि अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज से बनी एंटीबॉडीज ही प्रभावी मानी जा सकती हैं। सरकार भले ही लोगों वैक्सीनेशन के लिए लगातार प्ररित कर रही हो लेकिन अब भी लोगों के मन में वैक्सीनेशन से होने वाले साइड-इफेक्ट्स का डर व्याप्त है। कुछ लोगों को डर है कि वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर में ऐसे साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिनका असर दीर्घकालिक हो सकता है। पर क्या वास्तव में ऐसा है? क्या वास्तव में वैक्सीनेशन के कारण शरीर में किसी दीर्घकालिक साइड-इफेक्ट का खतरा हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, शरीर के बाहरी एंटीजन के संपर्क में आने के कारण होने वाली प्रतिक्रियाओं को साइड-इफेक्ट्स के रूप में जाना जाता है। किसी भी एंटीजन के खिलाफ शरीर की प्रतिक्रिया जैसी होती है, उससे होने वाले साइड-इफेक्ट्स भी उसी तरह के दिखते हैं। सामान्य तौर पर लोगों को बुखार, कमजोरी और हाथों में दर्द की समस्या हो रही है, पर क्या वैक्सीनेशन के कोई दीर्घकालिक साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में जानते हैं।