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डायबिटीज रोगियों को राहत: अब किडनी की बीमारी रोकना होगा आसान, अध्ययन में सामने आई यह महत्वपूर्ण बात

Fri, 02 Jul 2021 02:39 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज रोगियों में किडनी की समस्या - फोटो : Social media
Medically Reviewed by-
डा. अल्तमश शेख
(एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबेटोलॉजिस्ट)
मुंबई


भारत में डायबिटीज रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तेजी से बढ़ते इस रोग को लेकर चिंता जताते हुए इसके नियत्रंण और रोकथाम को लेकर विशेष जागरूक रहने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज रोगियों में किडनी की बीमारी होने का खतरा भी अधिक रहता है, जोकि समय के साथ गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है। इस बीच शोधकर्ताओं ने तीन ऐसे प्रोटीन के बारे में जानकारी दी है जिनका बढ़ा हुआ स्तर डायबिटीज रोगियों में किडनी फेलियर की समस्या को कम कर सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है यदि स्वास्थ्य विशेषज्ञ डायबिटीज रोगियों के इलाज के समय इन प्रोटीनों के स्तर को ध्यान में रखें तो उनमें किडनी फेलियर की दिक्कतों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो डायबिटीज के 30 फीसदी मरीजों को किडनी की समस्या होने का खतरा होता है। शोधकर्ताओं का कहना है यह अध्ययन डायबिटीज रोगियों को किडनी की बीमारियों से सुरक्षित रखने में विशेष भूमिका निभा सकती है। 
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प्रोटीन और किडनी रोगों के संबंध - फोटो : Pixabay
डायबिटीज और किडनी की बीमारी
30 जून को साइंस ट्रांसलेशन मेडिसिन नामक जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने तीन प्रोटीन और किडनी रोगों के संबंध की जिक्र किया है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि मधुमेह रोगियों में किडनी की बीमारियों को लेकर अब तक तमाम तरह के अध्ययन किए गए हैं, लेकिन डायबिटीज किस तरह से किडनी का समस्याओं का कारण बनती है और इसे शुरुआती स्तर पर कैसे रोका जा सकता है, इस बारे में विशेष अध्ययन नहीं किए गए हैं। 
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किडनी रोगियों की बढ़ती समस्या - फोटो : iStock
अध्ययन में तीन विशेष प्रकार के प्रोटीन का जिक्र
शोधकर्तओं की टीम ने इस अध्ययन में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में किडनी की समस्याओं से संबंधित प्रोटीन की पहचान की है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ANGPT1, FGF20, और TNFSF12 तीन ऐसे प्रोटीन हैं, जिनका उच्च स्तर डायबिटीज रोगियों में किडनी की समस्या को कम रोकने में सहायक हो सकता है। ये तीन सुरक्षात्मक प्रोटीन, एंड स्टेज रेनल डिजीज (ईएसआरडी) की प्रगति के जोखिम के अनुसार मधुमेह के व्यक्तियों को स्तरीकृत करने के लिए बायोमार्कर के रूप में काम कर सकते हैं। 

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डायबिटीज रोगियों में यूरिन इंफेक्शन की समस्या - फोटो : Social media
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डॉ अल्तमश शेख बताते हैं कि यह अध्ययन निश्चित ही डायबिटीज रोगियों में किडनी की समस्या को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि भारत में फिलहाल इस तरह के टेस्ट आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। डायबिटीज रोगियों में किडनी की बीमारी के बारे में पता करने के लिए यूरिन एल्ब्यूमिन क्रिएटिनिन रेस्यो (यूरिन एसीआर) टेस्ट को प्रयोग में लाया जाता रहा है। इससे आसानी से किडनी की समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। 
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ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखना आवश्यक - फोटो : iStock
डायबिटीज रोगी इन बातों का रखें ध्यान
डॉ अल्तमश शेख बताते हैं, डायबिटीज की रोकथाम का मतलब सिर्फ रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करना ही नहीं है, इसमें रोगी को अन्य अंगों का भी ख्याल रखना होता है जो सामान्यतौर पर डायबिटीज के कारण प्रभावित हो सकते हैं। डायबिटीज के सभी रोगियों को किडनी की समस्याओं से बचे रहने के लिए ब्लड शुगर, वजन और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को हर हाल में नियंत्रित रखने का प्रयास करते रहना चाहिए। यदि रोगी में शुगर का स्तर बहुत अधिक है या फिर उन्हें पेशाब में संक्रमण की समस्या है तो इस बारे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ऐसी समस्याएं किडनी की बीमारी का संकेत हो सकती हैं। 

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स्रोत और संदर्भ: 
Circulating proteins protect against renal decline and progression to end-stage renal disease in patients with diabetes

अस्वीकरण नोट: यह लेख साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन नामक जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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