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बचपन से ही अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकना चाहते थे भगत सिंह, बंदूकें बोकर क्रांति का देखते थे सपना

Sat, 28 Sep 2019 07:07 AM IST
ललित फुलारा लाइफस्टाइल डेस्क,अमर उजाला
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bhagat singh
28 सितंबर को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 112वीं जयंती है। शहीद भगत सिंह के बलिदान को भारत कभी नहीं भूल सकता है। वह आज भी लाखों-करोड़ो हिन्दुस्तानी के दिलों में बसते हैं। हिन्दुस्तान का बच्चा-बच्चा उन्हें जानता है। वह भारत के प्रमुख स्वंतत्रता सेनानी थे। भारत की आजादी में शहीद भगत सिंह  का बेहद अहम योगदान रहा है। देशभक्ति की झलक बचपन से ही भगत सिंह में दिखने लगी थी। 
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bhagat singh - फोटो : अमर उजाला
भगत सिंह जब छोटे थे तब एक दिन खेलते वक्त अचानक उनके हाथ में एक बंदूक लग गई। यह बंदूक उनके चाचा की थी। भगत सिंह वह बंदूक लेकर अपने चाचा के पास गए और उनसे पूछा कि क्या है और इससे क्या होता है? तब चाचा जी ने जवाब दिया कि यह बंदूक है और वह इससे अंग्रजी हुकूमत से लड़ेंगे। कुछ दिन बाद भगत सिंह अपने चाचा के साथ खेती करने गए। वहां उनके चाचा आम का पेड़ लगा रहे थे। 
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bhagat singh - फोटो : सोशल मीडिया
तब झट से भगत सिंह ने अपने चाचा से पूछा कि यह आप क्या कर रहे हो।चाचा ने कहा कि मैं आम का पेड़ लगा रहा हूं और जब यह पेड़ बड़ा हो जाएगा तब इसमें आम आने शुरू हो जाएंगे , जिसे हम सब मिलकर खाएंगे। अब नन्हे भगत सिंह को जाने क्या सूझा वह भाग कर अपने घर गए और चाचा की बंदूक लेकर आए।
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Bhagat Singh - फोटो : social media
भगत सिंह ने खेत में गढ्ढा खोदना शुरू कर दिया। यह सब होते हुए उनके चाचा देख रहे थे। जैसे ही भगत सिंह बंदूक को गढ्ढे में डालने ही वाले थे कि उतने में ही चाचा ने भगत सिंह से पूछने लगे कि यह तुम क्या कर रहे हो ? तब भगत सिंह बड़े उत्साह से बोलें कि मैं बंदूक की फसल उगा रहा हूं। इससे कई बंदूके पैदा होगीं और हम अंग्रेजी हुकुमत से अपने देश को आजाद करवा पाएंगे। 
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