हॉर्स रेस का एक दृश्य (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, घोड़ों के व्यापार के कारण ही पूनावाला परिवार का रिश्ता बड़े उद्योगपतियों से जुड़ा। वहीं, जब अदार के पिता सायरस ने घोड़ों के कारोबार को बढ़ाने के बारे में सोचा तो उनका ध्यान वैक्सीन उत्पादन की तरफ गया और उन्होंमे इस जोखिम को उठाया, क्योंकि इस क्षेत्र में भविष्य की कोई गारंटी नहीं दे सकता था। यही नहीं, उस दौर में भारत काफी सीमित स्तर पर वैक्सीन का उत्पादन करता था, जिसमें सरकार की भूमिका ज्यादा होती थी।