रोहिंग्या
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विभागीय मिलीभगत से इन्होंने बिजली कनेक्शन और पानी का कनेक्शन भी ले रखा है। कई के पास तो आधार कार्ड तक हैं। जिला प्रशासन की जांच में आधार कार्ड होने की बात सामने आ चुकी है। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी तथा भाजपा के मंत्रियों का एक समूह गठित किया था, लेकिन इस समूह की दो-तीन बैठकें ही हो पाईं थीं।
कैब के पास होने से रोहिंग्याओं के अब जम्मू में गिने चुने दिन ही रह गए हैं। विश्वास है कि जल्द ही घुसपैठिया मुक्त भारत होगा। जम्मू में रह रहे रोहिंग्याओं के चोरी तथा अन्य अपराधों में संलिप्त होने की बात सामने आ चुकी है। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इन्हें बाहर भेजने की कार्रवाई को सुनिश्चित करना चाहिए। - अंकुर शर्मा, एडवोकेट हाईकोर्ट (रोहिंग्याओं को बाहर करने के आंदोलन में शामिल रहे)