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Kheer Bhawani: खीर भवानी मंदिर में 8 जून को लगेगा मेला, जानें ऐतिहासिक धर्मस्थल से जुड़ी रहस्यमयी मान्यताएं

Fri, 03 Jun 2022 01:20 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

आठ जून को खीर भवानी मंदिर में मेले का आयोजन होने जा रहा है। इस मेले से कश्मीरी पंडितों की कई यादें जुड़ी हैं, जिसके चलते कश्मीरी पंडितों को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। 
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Kheer Bhawani Mandir - फोटो : अमर उजाला
मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला इलाके में खीर भवानी मंदिर स्थित है। घाटी में बाबा अमरनाथ के बाद खीर भवानी मंदिर की मान्यता सबसे ज्यादा है। जो लोग बाबा के दरबार नहीं जा पाते हैं, वे यहां आकर मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस मेले से कश्मीरी पंडितों की कई यादें जुड़ी हैं, जिसके चलते कश्मीरी पंडितों को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। देश व विदेशों में बसे कश्मीरी पंडित इस मेले में शामिल होने के लिए हर साल पहुंचते हैं।
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kheer bhawani - फोटो : AMAR UJALA
इस बार आठ जून को खीर भवानी मंदिर में मेले का आयोजन होने जा रहा है। श्रीनगर से पूर्व दिशा में 14 किलोमीटर दूर गांदरबल जिले के तुलमुला में यह मंदिर बसा है, जहां हर साल ज्येष्ठ अष्टमी पर विशाल मेले का आयोजन होता है। इसमें कश्मीरी पंडित मां खीर भवानी जिन्हें मां राघेन्या भी कहा जाता है, उनकी पूजन-अर्चना करते हैं।

पिछले दो सालों से कोरोना वायरस की महामारी के चलते इस मेले का आयोजन नहीं हो पाया था। ऐसे में इस बार मेले को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। लोगों के साथ-साथ प्रशासन भी इस मेले को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटा हुआ है।
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kheer Bhawani (File Photo) - फोटो : PTI
इस बीच घाटी में बढ़ी टारगेट किलिंग की घटनाओं ने डर का माहौल बना दिया है। इसे जम्मू के जगती टाउनशिप के माता खीर भवानी अस्थान ट्रस्ट ने मेले का बहिष्कार कर दिया है। उनका कहना है कि कि वे इस बार खीर भवानी मेले में शामिल नहीं होंगे। साथ ही उन्होंने अन्य लोगों से खास कर कश्मीर पंडितों से भी खीर भवानी मेले में नहीं जाने की आह्वान किया है। ऐसे में इस मेले का रंग इस बार फीका पड़ सकता है।

मेला रद्द नहीं हुआ, तैयारियां जोरों पर: डीसी
गांदरबल के जिला उपायुक्त श्यामबीर ने कहा कि खीर भवानी मेला रद्द नहीं हुआ है। उन्होंने टीम के साथ वीरवार को मेले की तैयारियों का जायजा लिया। रंग रोगन का काम पूरा हो चुका है, लाइटिंग भी लग चुकी है। नहाने की जगह साफ करवाई जा रही है, सभी शौचालयों की मरम्मत करवा दी गई है। टेंट और शामियाने लगाने की जगह भी तय कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जो लोग मेले के रद्द होने के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं, उनसे अनुरोध है कि ऐसा न करें। नहीं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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kheer Bhawani (File) - फोटो : PTI
1912 में हुआ था मंदिर का निर्माण, जानें मान्यता

इस मंदिर का निर्माण 1912 में महाराजा प्रताप सिंह ने कराया था। बाद में महाराजा हरी सिंह ने जीर्णोद्धार कराया। यह कश्मीरी पंडितों का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर मां राज्ञा माता ( खीर भवानी या राग्याना देवी) ने रावण को दर्शन दिए थे। जिसके बाद रावण ने उनकी स्थापना श्रीलंका की कुलदेवी के रूप में की थी। कुछ समय बाद रावण के व्यवहार और बुरे कर्मों के चलते देवी उससे रुष्ट हो गईं और श्रीलंका से जाने की इच्छा व्यक्त की। इसके बाद जब भगवान राम ने रावण का वध कर दिया तो उन्होंने भगवान हनुमान को यह काम दिया कि वह देवी के लिए उनका पसंदीदा स्थान चुनें और स्थापित करें। इस पर देवी ने कश्मीर के तुलमुला को चुना।

माना जाता है कि वनवास के दौरान राम राग्याना माता की आराधना करते थे तो मां राज्ञा माता को रागिनी कुंड में स्थापित किया गया।
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Kheer Bhawani Mandir - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि क्षीर भवानी माता किसी भी अनहोनी का संकेत पहले ही दे देती हैं। मंदिर के कुंड यानी चश्मे के पानी का रंग बदल जाता है। इतना ही नहीं क्षीर भवानी के रंग परिवर्तन का जिक्र आइने अकबरी में भी है।
 
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kheer Bhawani - फोटो : PTI
हर साल पूजा से पहले मंदिर के कुंड में दूध और खीर डालते हैं। इस खीर से चश्मे का पानी रंग बदलता है। खीर का मतलब दूध और भवानी का मतलब भविष्यवाणी है। यही कारण है कि झरने की मंदिर में बहुत महत्ता है। इस विचार से यहां के मुसलमान और पंडित दोनों सहमत हैं। यहां के मुस्लिमों का मानना है कि, ये हमारे लिए तीर्थ है, हमारी मुराद पूरी होती है।
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