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Bhajan Sopori: पांच वर्ष की उम्र में दी पहली प्रस्तुति, जम्मू-कश्मीर से खास रिश्ता, जानें भजन सोपोरी के बारे में सबकुछ

Thu, 02 Jun 2022 06:08 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू कश्मीर

सार

विश्व प्रसिद्ध संतूर वादक भजन सोपोरी का आज निधन हो गया। गुरुग्राम के निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार थे। उनके जाने से संगीत जगत में शोक की लहर है। इससे पहले 10 मई को मशहूर संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
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Bhajan Sopori - फोटो : सोशल मीडिया
विश्व प्रसिद्ध संतूर वादक भजन सोपोरी का आज निधन हो गया। गुरुग्राम के निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से बीमार थे। उनके जाने से संगीत जगत में शोक की लहर है। इससे पहले 10 मई को मशहूर संतूर वादक पंडित शिवकुमार शर्मा ने दुनिया को अलविदा कह दिया था।
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संतूर वादन करते पं. भजन सोपोरी।
भजन सोपोरी कश्मीर के रहने वाले थे। उनका जन्म 1948 में श्रीनगर में हुआ था। उनका पूरा नाम भजन लाल सोपोरी है और इनके पिता पंडित एसएन सोपोरी भी एक संतूर वादी थे। वे सूफियाना घराने से ताल्लुक रखते थे और पूरी दुनिया में अपनी कला के दम पर उन्होंने एक अलग पहचान बनाई थी।
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Bhajan Sopori - फोटो : सोशल मीडिया
पांच साल की उम्र में दी पहली प्रस्तुति

सोपोरी ने 1953 में पांच साल की उम्र में अपना पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी थी। भजन सोपोरी को घर पर ही उनके दादा एससी सोपोरी और पिता एसएन सोपोरी से संतूर की शिक्षा मिली थी। कहा जा सकता है कि संतूर वादन की शिक्षा उन्हें विरासत में मिली थी। दादा और पिता से इन्हें गायन शैली व वादन शैली में शिक्षा दी गई थी। भजन सोपोरी ने अंग्रेजी साहित्य में मास्टर्स डिग्री हासिल की थी। इसके बाद वाशिंगटन विश्वविद्यालय से पश्चिमी शास्त्रीय संगीत का अध्ययन भी किया।

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Bhajan Sopori - फोटो : सोशल मीडिया
पंडित सोपोरी ने जम्मू-कश्मीर को बाकी भारत के बीच सांस्कृतिक कड़ी के रूप में जोड़ने का काम किया है। उन्होंने 'सा मा पा' (सोपोरी अकादमी, संगीत और प्रदर्शन कला के लिए ) नामक एक संगीत अकादमी भी शुरू की है। यह अकादमी भारतीय शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने के कार्य कर रही है। सा मा पा अकादमी में कैदियों को संगीत की शिक्षा दी जाती है, ताकि उनके और समाज के बीच भावनात्मक बंधन बनाने के उद्देश्य से ऐसे किया जाता है। अकादमी ने कई संगीतकारों को प्रशिक्षित किया है और पुराने संगीत उपकरणों को पुनर्जीवित करने में भी अहम रोल अदा किया है। इसके लिए अकादमी को 2011 में जम्मू कश्मीर सरकार ने डोगरी पुरस्कार प्रदान किया था।
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Bhajan Sopori - फोटो : सोशल मीडिया
इन पुरस्कारों से किया गया है सम्मानित
पंडित सोपोरी को 1992 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। 2004 में पद्म श्री से सम्मानित किए गए। 2009 में उन्हें बाबा अलाउद्दीन खान पुरस्कार दिया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान के लिए उन्हें 2011 में एम एन माथुर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। साथ ही उन्हें जम्मू-कश्मीर स्टेट लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी नवाजा गया है।
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