इस बार बासमती 370 की जगह पर नई किस्म 123 और 138 की पैदावार होगी। इससे किसानों की आय भी डबल हो जाएगी। अब तक किसान बासमती 370 उगा रहे थे। आजादी के बाद से फसल उगाई जा रही है। इससे आय में खासा इजाफा नहीं हुआ। चावल की नई वैरायटी पर स्कास्ट जम्मू में शोध हुआ और नई किस्मों को लांच किया गया। अब स्कास्ट जे के माध्यम से बीज किसानों को मुहैया करवाया जा रहा है। कृषि विभाग ने भी किसानों को नई किस्म की खेती करने के लिए कहा है। नई वैरायटी की खासियत यह है कि एक हेक्टेयर में 45 से 50 किलोग्राम पैदावार होती है जबकि पहले से बीजी जा रही बासमती एक हेक्टेयर में 30 किलोग्राम के आसपास ही निकलती है। पैदावार बढ़ने से आय में इजाफा होगा। खास बात यह है कि बासमती सुंगधित है। खाने में स्वादिष्ट है। बाजारों में भी इसकी खास डिमांड रहेगी।
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बासमती चावल
- फोटो : अमर उजाला
बासमती 370 बाजारों में सौ से 110 रुपये किलो केे हिसाब से बिक रही थी। अब नई वैरायटी की बासमती भी बाजारों में अक्तूबर माह से उपलब्ध होगी।
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बासमती बीज
- फोटो : अमर उजाला
बीज किसानों को वितरित किया जा चुका है। अब बीजाई का काम आरंभ होगा।
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बासमती चावल
- फोटो : अमर उजाला
वहीं 90 दिनों के अंदर बासमती की फसल तैयार हो जाएगी। पहले 120 से 150 दिन फसल पकने में लगते थे।
नई वैरायटी की बासमती खेतों में उगेगी। बीज मुहैया करवाया गया है। यूनिवर्सिटी के फार्मों में पांच सालों से बीजाई की जा रही है। इसकी पैदावार ज्यादा है। इस बार किसानों को फायदा होगा। -जेपी शर्मा, शोध निदेशक, स्कास्ट जम्मू