तीन महीने से अधिक के कठोर प्रशिक्षण के बाद एसपीओ के एक विशेष बैच की नियुक्ति भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों में होने जा रही है। इससे पुलिस का सुरक्षा तंत्र सीमावर्ती क्षेत्रों में और भी मजबूत हो जाएगा। साथ ही एसपीओ सीमा प्रहरियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सीमावर्ती ग्रिड को और भी मजबूत करेंगे। इन दिनों महिला एसपीओ सहित 74 एसपीओ का एक बैच नियमित रूप से विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों में भाग ले रहा है। सीमा प्रबंधन तकनीकों में कुशलता, कानून और व्यवस्था की समस्या से निपटने, आपात काल जैसी स्थितियों के समय पुलिस, सीमा प्रहरियों, प्रशासन की सहायता करने, विशेष रूप से सीमा पार से गोलीबारी के दौरान अपनी सेवाएं देने के लिए इन एसपीओ को प्रशिक्षित किया जा रहा है। एसएसपी कठुआ रमेश चंद्र कोतवाल ने बताया कि विभिन्न तबकों से मांग की जा रही थी कि स्थानीय युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों में लगाया जाना चाहिए, क्योंकि वे क्षेत्र से अच्छी तरह वाकिफ हैं और तत्काल कार्रवाई करते हैं। यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी, जिसके बाद एसपीओ को सीमा प्रबंधन के लिए जम्मू, सांबा, कठुआ, पुंछ, राजौरी जैसे सीमावर्ती जिलों में बैचों में लगाया गया था।
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SPO Recruitment kathua
- फोटो : बासित जरगर
उन्होंने बताया कि कठुआ जिले में प्रशिक्षण ले रहे वर्तमान बैच में 16 महिला सहित 74 एसपीओ शामिल हैं। तीन महीने की प्रशिक्षण अवधि पूरी होने वाली है और उन्हें सीमा प्रबंधन को मजबूत करने और ग्रिड को बढ़ाने के लिए और तैनात किया जाएगा।
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एसपीओ भर्ती
- फोटो : अमर उजाला
95 एसपीओ का एक बैच पहले ही तैनात
कठुआ में लगभग 95 एसपीओ का एक बैच पहले ही तैनात किया जा चुका है। एसएसपी कठुआ ने बताया कि फायरिंग रेंज बसंतपुर में एसपीओ का बेसिक फायरिंग अभ्यास भी आयोजित किया गया था और ड्यूटी के दौरान हथियारों और गोला-बारूद के उपयोग में प्रशिक्षित किया गया है।
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बॉर्डर क्षेत्र।
एसएसपी ने कहा कि प्रशिक्षण अवधि के बाद बैच को सीमा पुलिस चौकियों, सीमा पुलिस थानों और जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग से लगे सीमावर्ती गांवों में भी तैनात किया जाएगा। उन्होंने खुलासा किया कि इनमें कुछ स्वेच्छा से एसओजी में शामिल हैं, जो सीमा पर परिचालन अभ्यास में अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सहायता के काम करेंगे।
गोलाबारी के दौरान लोगों की मदद करने में आगे रहते हैं एसपीओ
एसएसपी ने बताया कि सीमा पर गोलाबारी के दौरान लोगों की मदद करना, सामुदायिक बंकरों में सहायता करना, चिकित्सा आपात स्थिति प्रदान करना उन कुछ कार्यों में शामिल हैं जिनके जिम्मेदारी इन एसपीओ को सौंपी जानी है। कोतवाल ने कहा कि तैनाती के बाद महिला एसपीओ की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि वे सीमावर्ती बस्तियों में महिलाओं से संबंधित चिंताओं से निपटने में सक्षम हैं। पुलिस आमतौर पर थर्ड टियर में आती है। एसपीओ की तैनाती बहुत फायदेमंद है क्योंकि वे कठिन परिस्थितियों को कम करने के लिए अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ तालमेल बनाए रखते हैं।