दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले में मंगलवार शाम आतंकियों ने होमाशालीबुग विधानसभा क्षेत्र के भाजपा अध्यक्ष जावेद अहमद डार की घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि घटना को अंजाम देने के बाद आतंकी आसपास के लोगों को धमकी देते हुए भाग निकले। सुरक्षा बलों ने आसपास के इलाकों को घेरकर तलाशी शुरू कर दी है।
भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने घटना की निंदा की है। भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि आतंकी हताश हो गए हैं, इसलिए बेकुसूरों और निहत्थों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने इसे कायरतापूर्ण और बर्बर कृत्य करार दिया। साथ ही पुलिस से हत्यारों को पकड़ने और कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की।उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बीते दो वर्षों में 23 भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। जबकि आतंकियों ने इस साल अब तक पांच भाजपा नेताओं की हत्या की है। इसके अलावा नौ नागरिकों, छह पुलिसकर्मियों और सेना के जवान को भी इसी साल निशाना बनाया गया। अनुच्छेद 370 हटने के बाद भाजपा के दर्जनभर से अधिक भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है।
पिछले एक साल में केवल कुलगाम जिले में 9 लोगों को मारा गया। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। दक्षिण कश्मीर में पुलिस के लिए अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और भाजपा कार्यकर्ताओं और कार्यकर्ताओं को सुरक्षित आवास मुहैया कराने का समय आ गया है। भाजपा नेताओं पर हमलों को रोकने के लिए उपाय किए जाने की जरूरत है।
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BJP leader on target of terrorists in Kashmir
- फोटो : अमर उजाला
आपको बता दें कि नौ अगस्त को अनंतनाग जिले में घात लगाकर आतंकियों ने भाजपा सरपंच गुलाम रसूल डार और उनकी पत्नी की हत्या कर दी थी। बीते साल इसी तारीख को आतंकियों ने बडगाम में भाजपा जिलाध्यक्ष पर हमला किया था। आतंकियों ने इस हमले को वो उस वक्त अंजाम दिया जब अब्दुल सुबह सैर पर निकले थे। आतंकियों की फायरिंग का शिकार हुए अब्दुल ने उपचार के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था।
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BJP sarpanch and his wife killed by terrorists in Anantnag
- फोटो : अमर उजाला
अब्दुल की हत्या के तीन दिन पहले कुलगाम जिले में आतंकियों ने भाजपा से जुड़े सरपंच सज्जाद खांडे की हत्या कर दी थी। इससे पहले चार अगस्त को कुलगाम में पंच पीर आरिफ अहमद शाह को गोली मार दी गई थी।
वहीं जुलाई महीने में भाजपा के बांदीपोरा जिलाध्यक्ष वसीम बारी और उनके दो परिजनों की हत्या कर दी गई थी। 15 जुलाई को सोपोर में भाजपा नेता मेहराजुद्दीन मल्ला को अगवा किया गया था, हालांकि इन्हें दस घंटे में ही मुक्त करा लिया गया था। इस घटना के करीब एक माह पूर्व आठ जून को अनंतनाग में कांग्रेस नेता और सरपंच अजय पंडिता की हत्या कर दी गई थी।
गौरतलब है कि घाटी में जम्हूरियत की मजबूती में जुटे नेताओं, कार्यकर्ताओं से लेकर पंचायती नुमाइंदों पर पहले भी आतंकी हमले होते रहे हैं। वर्ष 1990 से 2009 तक 587 सियासी लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। सर्वाधिक राजनीतिक हत्याएं चुनावी वर्ष 2002 में हुई थीं। इसके अलावा चुनावी वर्ष 1996 में 75, 1998 में 45, 1999 में 53 और 2004 में 60 राजनीतिक हत्याएं हुईं।